देश की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को अमेरिका में लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद में बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने मंगलवार को जानकारी दी कि उसे इस मामले में हर्जाना, ब्याज और कानूनी खर्चों के लिए अतिरिक्त $ 70 मिलियन यानी लगभग ₹. 603 करोड़ का एकमुश्त विशेष व्यय दर्ज करना पड़ेगा। कंपनी ने नियामकीय सूचना में बताया कि अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले की समीक्षा करने संबंधी उसकी याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। यह फैसला संयुक्त राज्य अमेरिका की पाँचवीं सर्किट अपीलीय अदालत द्वारा 15 जून को दिए गए निर्णय से जुड़ा हुआ है।
यह मामला कंप्यूटर साइंसेज कॉरपोरेशन (सीएससी) से संबंधित है, जिसे अब डीएक्ससी टेक्नोलॉजी के नाम से जाना जाता है। दोनों कंपनियों के बीच व्यापारिक गोपनीयता से जुड़े विवाद को लेकर कई वर्षों से कानूनी लड़ाई चल रही है। सर्वोच्च न्यायालय के ताजा निर्णय के बाद टीसीएस को इस मामले में एक और बड़ा कानूनी झटका लगा है। टीसीएस ने बताया कि वह पहले ही इस मामले से संबंधित ₹. 1,293 करोड़ के बराबर $ 150 मिलियन की राशि अपने खातों में प्रावधान के रूप में दर्ज कर चुकी थी। अब नए निर्णय के बाद कंपनी अतिरिक्त $ 70 मिलियन का प्रावधान करेगी, जिसे वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में विशेष व्यय के रूप में शामिल किया जाएगा।
कंपनी इससे पहले भी जून 2024 और नवंबर 2025 में नियामकीय सूचनाओं के माध्यम से निवेशकों को इस मामले की जानकारी दे चुकी है। इससे पहले पाँचवीं सर्किट अदालत ने सीएससी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए टीसीएस पर $ 194.2 मिलियन यानी लगभग ₹. 1,676 करोड़ के हर्जाने को बरकरार रखा था। हालांकि कंपनी ने इस अतिरिक्त प्रावधान से आगे होने वाले संभावित वित्तीय प्रभावों पर कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय का असर कंपनी के तिमाही लाभ पर पड़ सकता है, हालांकि टीसीएस की मजबूत वित्तीय स्थिति ऐसे झटकों को संभालने में सक्षम मानी जाती है।
इस बीच शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में मजबूती देखी गई। मंगलवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर टीसीएस का शेयर 2 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ ₹. 2,208.50 पर कारोबार करता दिखाई दिया। टीसीएस के शेयर ने पिछले 52 सप्ताह में ₹. 3,539.45 का उच्चतम स्तर और ₹. 2,110.00 का न्यूनतम स्तर छुआ है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब कंपनी के आगामी तिमाही नतीजों और इस कानूनी मामले के दीर्घकालिक प्रभाव पर बनी हुई है।

