मुंबई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ नियामक कार्रवाई पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा है कि यह एक अर्ध-न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका समाधान केवल कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
भारत निवेशक सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में पांडे ने कहा कि सिद्धांत के तौर पर SEBI किसी भी व्यक्तिगत मामले पर मीडिया में टिप्पणी नहीं करता। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में आदेश जारी किए जाते हैं और संबंधित पक्षों को या तो उनका पालन करना होता है या फिर कानून के तहत उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार उन्हें चुनौती देनी होती है। इसलिए वह इस विषय पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं करेंगे। SEBI अध्यक्ष ने यह भी जानकारी दी कि नियामक संस्था की टोकनाइजेशन पायलट परियोजना को पूरा होने में अभी लगभग 6 से 9 महीने का समय लग सकता है। उन्होंने बॉन्ड ब्रोकरों से जुड़े आगामी नियमों और टोकनाइजेशन से संबंधित पहलों पर भी चर्चा की।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रवर्तक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश मेहता को कंपनी की प्रतिभूतियों में कारोबार करने से रोक दिया था। SEBI ने उन पर वित्तीय अनियमितताओं, धन के कथित दुरुपयोग तथा फंड प्रवाह और संबंधित पक्षों के लेनदेन से जुड़ी पर्याप्त जानकारी नहीं देने के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों के बाद राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों पर लगातार दबाव बना हुआ है। सोमवार को कंपनी का शेयर बीएसई पर अपने निचले सर्किट स्तर .₹94.50 तक पहुंच गया। यह लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में शेयर निचले सर्किट में बंद हुआ।
पिछले सप्ताह भी कंपनी के शेयरों में लगातार दो कारोबारी सत्रों तक गिरावट दर्ज की गई थी। SEBI द्वारा अंतरिम आदेश जारी किए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ी, जिसमें वित्तीय विवरणों में बड़े पैमाने पर कथित गलत प्रस्तुतीकरण का आरोप लगाया गया था। बाजार नियामक की अंतरिम जांच के अनुसार प्रथम दृष्टया यह सामने आया कि धनराशि को व्यक्तिगत खातों और संबंधित संस्थाओं के माध्यम से स्थानांतरित किया गया तथा इसके संबंध में पर्याप्त जानकारी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। जांच में फंड के प्रवाह की कई परतें बनाए जाने के संकेत भी मिले हैं। SEBI ने कहा कि कंपनी को कई बार सही वित्तीय विवरण उपलब्ध कराने तथा धनराशि के अंतिम उपयोग और लाभार्थियों के बारे में स्पष्ट जानकारी देने का अवसर दिया गया, लेकिन कंपनी की ओर से दिए गए जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए।
इसके अलावा नियामक ने वैधानिक लेखा परीक्षकों के कथित असहयोग पर भी चिंता जताई। SEBI के अनुसार बयान दर्ज कराने के दौरान आश्वासन दिए जाने के बावजूद ऑडिट से जुड़े कार्यपत्र उपलब्ध नहीं कराए गए। नियामक संस्था का कहना है कि लंबे समय तक जारी यह असहयोग महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाने और जांच प्रक्रिया में बाधा डालने के संभावित प्रयासों की ओर संकेत करता है। SEBI ने अपनी टिप्पणियों में यह भी कहा कि कंपनी की कुल आय का लगभग 97 प्रतिशत से 99 प्रतिशत हिस्सा बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया गया प्रतीत होता है। नियामक ने कथित अनियमितताओं को अत्यंत गंभीर और अभूतपूर्व बताया है।
अंतरिम आदेश में कहा गया है कि राजेश मेहता कंपनी के वित्तीय संचालन पर पर्याप्त नियंत्रण रखते थे। इसी आधार पर उन्हें अगले आदेश तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कंपनी की प्रतिभूतियों की खरीद, बिक्री या किसी भी प्रकार के लेनदेन से प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि, राजेश एक्सपोर्ट्स ने सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसके वित्तीय आंकड़े सही तरीके से प्रस्तुत किए गए हैं और किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है। शेयर बाजार को दी गई सूचना में कंपनी ने कहा कि उसके और नियामक के बीच संवाद में कुछ कमी दिखाई देती है। कंपनी ने विश्वास जताया कि प्रमाणित दस्तावेज उसके पक्ष को मजबूत करेंगे और आरोपों का उचित जवाब देंगे।

