मुंबई: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने से निवेशकों में सतर्कता रही, जिसके चलते बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। खासतौर पर बैंकिंग शेयरों में भारी कमजोरी दर्ज की गई, जबकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कुछ शेयरों में खरीदारी से बाजार को सीमित सहारा मिला। Nifty 150.50 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,176.15 पर बंद हुआ। वहीं Sensex 516.33 अंक यानी 0.66 प्रतिशत टूटकर 77,328.19 पर बंद हुआ।
विशेषज्ञों के अनुसार Nifty के लिए 24,250 से 24,300 का स्तर फिलहाल मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है। यदि सूचकांक इस स्तर के ऊपर लगातार बना रहता है तो बाजार में तेजी का रुख मजबूत हो सकता है और यह 24,400 से 24,500 के स्तर तक पहुंच सकता है। दूसरी ओर 24,100 से 24,000 का क्षेत्र बाजार के लिए महत्वपूर्ण सहारा माना जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। दिनभर के कारोबार में टाइटन, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज और एशियन पेंट्स के शेयरों में मजबूती रही। इन कंपनियों ने बाजार की कमजोरी के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया। दूसरी ओर भारतीय स्टेट बैंक, कोल इंडिया, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और बजाज फाइनेंस के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।
क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे अधिक दबाव दिखाई दिया। Nifty पीएसयू बैंक, Nifty प्राइवेट बैंक और Nifty बैंक सूचकांक सबसे कमजोर क्षेत्रीय सूचकांक रहे। वैश्विक तनाव बढ़ने के कारण निवेशकों ने वित्तीय शेयरों में जोखिम कम करने का प्रयास किया, जिससे इन शेयरों में बिकवाली तेज हुई। इसके विपरीत Nifty आईटी सूचकांक ने अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में खरीदारी की। साथ ही तकनीकी सेवाओं की स्थिर मांग की उम्मीद से भी इस क्षेत्र को समर्थन मिला।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद कमजोर पड़ने से ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.66 प्रतिशत बढ़कर 100.72 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। इससे महंगाई बढ़ने और तेल आयात पर निर्भर देशों, विशेषकर भारत, पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका और ईरानी बलों के बीच बढ़ती गतिविधियों ने वैश्विक बाजारों की सकारात्मक धारणा को कमजोर कर दिया। ईरान द्वारा अमेरिका पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाए जाने के बाद निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसका असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर दिखाई दिया।




