New Delhi,
Renault Group India ने गुरुवार को बताया कि उसने अपने भारत संचालन के पुनर्गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए National Company Law Tribunal (NCLT) का रुख किया है। कंपनी का उद्देश्य अपने ऑपरेटिंग ढांचे को अधिक सुव्यवस्थित बनाना है ताकि भविष्य की रणनीतियों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। कंपनी द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना के तहत पावरट्रेन मैन्युफैक्चरिंग को एक अलग इकाई में विभाजित किया जाएगा, जबकि वाहन निर्माण और बिक्री गतिविधियों को एक ही ढांचे के अंतर्गत एकीकृत किया जाएगा। इस बदलाव का मकसद विभिन्न व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप संचालन को अधिक प्रभावी बनाना है।
Renault Group India का कहना है कि यह कदम भारत को एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात केंद्र के रूप में मजबूत करने की उसकी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक भारत से वार्षिक निर्यात को 2 बिलियन यूरो तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित पुनर्गठन से वर्तमान संचालन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कर्मचारियों, ग्राहकों, डीलरों, सप्लायर और अन्य भागीदारों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। सभी मौजूदा रोजगार शर्तें, सेवाएं और व्यावसायिक संबंध पहले की तरह जारी रहेंगे।
Renault Group India ने यह भी दोहराया कि उसकी सभी मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई और सर्विस प्रतिबद्धताएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी। भारत को वह अपने प्रमुख बाजार और उत्पादन आधार के रूप में देखती है। कंपनी की भारत में मजबूत उपस्थिति है, जहां लगभग 15,000 कर्मचारी विभिन्न मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों, इंजीनियरिंग, रिसर्च और डिजाइन केंद्रों में कार्यरत हैं। यह कंपनी घरेलू मांग के साथ-साथ वैश्विक कार्यक्रमों को भी पूरा करती है।
February महीने में कंपनी ने 3,495 यूनिट की थोक बिक्री दर्ज की, जो पिछले वर्ष के इसी महीने में 2,676 यूनिट की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। यह वृद्धि Kiger और Triber मॉडलों की मजबूत मांग के कारण हुई है। Renault Group India देशभर में 600 से अधिक टचपॉइंट्स के साथ अपनी बिक्री और सर्विस नेटवर्क संचालित करती है। इसके साथ ही यह कंपनी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वाहनों, कंपोनेंट्स और इंजीनियरिंग सेवाओं का निर्यात भी करती है।




