Wednesday, August 12, 2026 |
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भारत में एफडीआई प्रवाह में तेजी, सेवा क्षेत्र बना सबसे बड़ा आकर्षण

by Business Remedies
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Foreign investment growth in India and the contribution of the service sector

New Delhi,

भारत में विदेशी निवेश को लेकर सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश में सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह बढ़कर 90.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 13 प्रतिशत अधिक है। जनवरी 2025 में यह आंकड़ा 80.3 अरब डॉलर था। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह वृद्धि मजबूत आर्थिक आधार और घरेलू मांग में सुधार के कारण संभव हुई है। सकल एफडीआई (रिपैट्रिएशन को छोड़कर) भी बढ़कर 36.3 अरब डॉलर के तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 38.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में एफडीआई का प्रवाह ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों प्रकार की परियोजनाओं में संतुलित रूप से आ रहा है। ग्रीनफील्ड परियोजनाएं मुख्य रूप से आईटी और बैंकिंग क्षेत्र में केंद्रित हैं, जबकि ब्राउनफील्ड निवेश मौजूदा भारतीय कंपनियों में विदेशी हिस्सेदारी बढ़ाने, संयुक्त उपक्रम, विलय और अधिग्रहण के रूप में देखा जा रहा है।

सेवा क्षेत्र का दबदबा कायम

एफडीआई प्रवाह में सेवा क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक रहा है। कुल निवेश में इसकी हिस्सेदारी 46 प्रतिशत रही। वहीं विनिर्माण क्षेत्र, जो कुल प्रवाह का लगभग एक-चौथाई है, अब ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए क्षेत्रों में भी फैल रहा है। इसमें सरकारी नीतियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में वैश्विक एफडीआई में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 2.4 प्रतिशत हो गई, हालांकि यह पिछले पांच वर्षों के औसत 2.6 प्रतिशत से थोड़ा कम है। वहीं एशिया में एफडीआई प्रवाह में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर 6.4 प्रतिशत हो गई, जो पांच वर्ष के औसत 5.7 प्रतिशत से अधिक है।

शुद्ध एफडीआई में कमजोरी

हालांकि सकल एफडीआई में वृद्धि के बावजूद शुद्ध एफडीआई का स्तर अभी भी काफी कम बना हुआ है। जनवरी 2026 में यह केवल 0.5 अरब डॉलर रहा। इसका मुख्य कारण निवेश की वापसी और विदेशों में बढ़ते निवेश को माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि सकल एफडीआई में मजबूती उत्साहजनक है और आगे भी यह रुझान बना रह सकता है। हालांकि निवेश का आकार परियोजनाओं और समझौतों पर निर्भर रहेगा, और घरेलू तथा वैश्विक आर्थिक स्थितियों का भी इस पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि शुद्ध एफडीआई का रुझान देश की बाहरी आर्थिक स्थिति के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह चालू खाते के लिए स्थिर वित्तीय स्रोत माना जाता है।



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