New Delhi,
अमेरिका में भारत से जुड़े निर्यात पर लगाए गए शुल्क की वापसी अब बड़े स्तर पर होने की संभावना जताई जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कुल राशि लगभग 10 से 12 अरब डॉलर के बीच रह सकती है। यह पहल तब शुरू हुई जब अमेरिका प्रशासन ने 166 अरब डॉलर के दावों के लिए एक विशेष प्रक्रिया शुरू की, जो पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समय लगाए गए शुल्क से संबंधित है, जिन्हें बाद में अदालतों ने निरस्त कर दिया था।
दावा प्रक्रिया शुरू, लेकिन भारतीय निर्यातकों को सीधा अधिकार नहीं
यह प्रक्रिया 20 अप्रैल से शुरू हुई है, लेकिन इसमें केवल अमेरिका स्थित आयातक ही दावा कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि भारतीय निर्यातकों के पास सीधे तौर पर धन वापसी मांगने का कोई कानूनी रास्ता नहीं है। ऐसे में भारतीय कंपनियां अब अमेरिकी खरीदारों के साथ बातचीत पर निर्भर हैं।
निर्यातकों को अपने हिस्से की राशि पाने के लिए नए समझौते करने, कीमतों में बदलाव करने या भविष्य के अनुबंधों की शर्तों में सुधार करने की जरूरत पड़ सकती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल अनुमानित राशि बड़ी जरूर है, लेकिन भारतीय निर्यातकों को वास्तविक लाभ उनकी बातचीत की क्षमता और अमेरिकी साझेदारों के साथ व्यापारिक शर्तों को दोबारा तय करने पर निर्भर करेगा। कपड़ा और परिधान, इंजीनियरिंग सामान और रसायन क्षेत्र ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं, जिन्हें पहले शुल्क बढ़ने से सबसे अधिक नुकसान हुआ था। इसलिए इन्हीं क्षेत्रों में वापसी की सबसे अधिक संभावना मानी जा रही है।
जटिल प्रक्रिया, लंबा इंतजार संभव
यह पूरी प्रक्रिया अमेरिका की सीमा शुल्क एजेंसी द्वारा संचालित की जा रही है। पहले चरण में उन आयात मामलों को शामिल किया गया है जो अभी जांच में हैं या हाल के 80 दिनों में पूरे हुए हैं। पुराने मामलों के लिए कंपनियों को आगे के चरणों का इंतजार करना होगा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में ही करीब 127 अरब डॉलर की राशि वापसी के लिए योग्य मानी जा रही है। दावा करने के लिए आयातकों को अपने दस्तावेज, शुल्क भुगतान का रिकॉर्ड और अन्य जरूरी जानकारी जमा करनी होगी। वर्तमान में यह एजेंसी लगभग 5 करोड़ 30 लाख प्रविष्टियों और 3 लाख 30 हजार आयातकों के मामलों को संभाल रही है।
वापसी में 60 से 90 दिन लग सकते हैं
दावे की मंजूरी के बाद भी भुगतान मिलने में 60 से 90 दिन का समय लग सकता है। इससे साफ है कि पूरी प्रक्रिया लंबी और जटिल रहने वाली है। हालांकि, बाद में लगाए गए नए शुल्क अलग कानूनी प्रावधान के तहत हैं, लेकिन अदालत के फैसले के कारण पुराने शुल्क को सही नहीं ठहराया जा सकता। ऐसे में यह प्रक्रिया कई आयातकों के लिए लंबी वापसी यात्रा की शुरुआत मानी जा रही है।

