जयपुर | बीआर न्यूज नेटवर्क | देश में लगातार बढ़ती डीजल की कीमतों ने खेती की लागत को काफी बढ़ा दिया है। सिंचाई के लिए डीजल पंप चलाने वाले किसानों पर हर महीने हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। ऐसे में अब किसान धीरे-धीरे डीजल से दूरी बनाकर सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई की ओर बढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार की पीएम-कुसुम योजना इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बन रही है।
गौरतलब है कि बढ़ती डीजल कीमतों और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प बनकर उभरी है। राजस्थान सहित कई राज्यों में यह मॉडल तेजी से अपनाया जा रहा है। यदि यही रफ्तार बनी रही तो आने वाले वर्षों में राजस्थान सहित देश की खेती डीजल मुक्तहोकर पूरी तरह सौर ऊर्जा आधारित हो सकती है।
डीजल पंप : बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव
भारत में सिंचाई के लिए बड़ी संख्या में किसान आज भी डीजल पंपों पर निर्भर हैं। कृषि मंत्रालय के एक अनुमान के अनुसार देश में लगभग 1.12 करोड़ डीजल पंप उपयोग में हैं। एक किसान को डीजल पंप चलाने में हर महीने 8,000 रुपए या उससे अधिक खर्च करना पड़ता है। सालाना यह खर्च 50-60 हजार रुपए तक पहुंच जाता है, जिससे छोटे और मध्यम किसान आर्थिक रूप से कमजोर होते जा रहे हैं।
पर्यावरण पर भी भारी पड़ रहे डीजल पंप
डीजल पंप न सिर्फ महंगे हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक हैं। हर साल लाखों लीटर डीजल की खपत से बड़े स्तर पर कार्बन उत्सर्जन होता है। अनुमान है कि सोलर पंप अपनाने से 85 मिलियन लीटर डीजल की बचत संभव है।
समाधान : पीएम-कुसुम योजना
किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार ने 2019 में पीएम-कुसुम योजना शुरू की।
इस योजना के प्रमुख घटक हैं-
1. खेतों में सोलर प्लांट लगाना : डीजल पंपों की जगह सोलर पंप देना, बिजली से जुड़े पंपों को सोलर से जोडऩा।
2. डीजल पर निर्भरता कम करना : किसानों को सस्ती व स्थायी ऊर्जा देना। अतिरिक्तबिजली बेचकर आय बढ़ाना।
देश और राजस्थान में सोलर पंप की स्थिति
1. देशभर में 2022 से अब तक 10.9 लाख से अधिक पंप सोलराइज किए जा चुके हैं। अकेले कंपोनेंट-बी के तहत 1.23 लाख से अधिक स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाए गए हैं। कुल मिलाकर देश में 3.85 लाख से अधिक सोलर पंप स्थापित हो चुके हैं।
राजस्थान की स्थिति
राजस्थान इस योजना में देश के अग्रणी राज्यों में है। यहां करीब 1 लाख से अधिक किसानों ने सोलर पंप लगवाए हैं। राज्य में पीएम-कुसुम योजना के तहत 3000 मेगावाट से अधिक सौर क्षमता हासिल की जा चुकी है। कंपोनेंट बी के जरिए बड़ी संख्या में डीजल पंपों को सोलर में बदला जा रहा है।
किसानों को हो रहा सीधा फायदा
सोलर पंप अपनाने से किसानों को कई लाभ मिल रहे हैं-
1. सिंचाई की लागत लगभग शून्य
2. दिन में निर्बाध बिजली उपलब्ध
3. अतिरिक्त बिजली बेचकर आय का स्रोत
4. 20-25 साल तक टिकाऊ समाधान।
सरकार बीते काफी समय से यह प्रयास कर रही थी कि हमें एनर्जी सोर्स को नवीनीकरण ऊर्जा की ओर लाना पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल भारत बड़ी मात्रा में इंपोर्ट करता है। इससे यह साबित होता है कि पेट्रोल-डीजल हमारा ऊर्जा स्रोत नहीं है। इस कारण यह समस्या हमारे सामने है। सरकार के प्रयासों से व जागरूकता के चलते हमें नवीनीकरण ऊर्जा को ज्यादा से ज्यादा अपनाना पड़ेगा। इसकी शुरुआत किसान कर चुके हैं और सिंचाई के लिए खेतों में सोलर प्लांट्स लगा रहे हैं। यह कदम सराहनीय है। इसके अलावा चाहे घरेलू ऊर्जा हो या अन्य ऊर्जा हमें नवीनीकरण ऊर्जा की ओर जाना चाहिए।
– नितिन अग्रवाल, सीईओ,
राजस्थान सोलर एसोसिएशन

