New Delhi,
घरेलू वायदा बाजार में शुक्रवार को सोना और चांदी की कीमतों में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करने और सुरक्षित निवेश की मांग में नरमी आने से यह गिरावट देखने को मिली।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोना लगभग 0.56 प्रतिशत गिरकर प्रति 10 ग्राम 1,52,561 रुपये के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। वहीं चांदी के वायदा भाव (5 मई) में भी लगभग 0.7 प्रतिशत की गिरावट आई और यह प्रति किलोग्राम 2,42,067 रुपये के स्तर तक फिसल गया। दिन के कारोबार के दौरान सोना 1,52,990 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंचा, लेकिन बाद में इसमें गिरावट आई। सुबह करीब 11:20 बजे यह 1,52,810 रुपये पर कारोबार करता दिखा, जो 624 रुपये या 0.41 प्रतिशत की कमजोरी दर्शाता है। दूसरी ओर, चांदी ने दिन में 2,43,704 रुपये का उच्च स्तर छुआ, लेकिन बाद में इसमें भी गिरावट आई। अंतिम जानकारी के अनुसार यह 2,42,899 रुपये पर कारोबार कर रही थी, जो 869 रुपये या 0.36 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, सोना 1,52,500 रुपये के ऊपर बना हुआ है और निचले स्तरों पर धीरे-धीरे खरीदारी देखी जा रही है। हालांकि, अभी तेजी की स्पष्ट दिशा नहीं बनी है। यदि कीमतें 1,53,000 रुपये के ऊपर स्थिर होती हैं, तो आगे 1,55,000 रुपये तक बढ़ने की संभावना बन सकती है। नीचे की ओर, यदि सोना 1,52,000 रुपये से नीचे जाता है, तो यह 1,50,000 रुपये और 1,48,000 रुपये तक कमजोर हो सकता है। फिलहाल रुझान हल्का सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन मजबूती के लिए स्पष्ट उछाल जरूरी माना जा रहा है। चांदी की बात करें तो यह 2,42,000 रुपये के ऊपर टिकी हुई है, जिसे सुरक्षित निवेश की मांग और औद्योगिक उपयोग दोनों से सहारा मिल रहा है। हालांकि, कीमतों में अभी सतर्कता बनी हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी के लिए 2,45,000 रुपये से 2,47,000 रुपये के स्तर पर रुकावट है। यदि यह स्तर पार होता है, तो कीमतें 2,50,000 रुपये से 2,52,000 रुपये तक जा सकती हैं। वहीं, अगर कीमत 2,40,000 रुपये से नीचे जाती है, तो यह 2,36,000 रुपये से 2,35,000 रुपये तक गिर सकती है। हाल के समय में कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है, क्योंकि निवेशक अब अधिक जोखिम वाले विकल्पों जैसे शेयर बाजार की ओर रुख कर रहे हैं। वैश्विक तनाव में कमी के संकेत मिलने से भी सोना और चांदी की मांग पर असर पड़ा है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच जारी अनिश्चितता के कारण कीमतों में अधिक गिरावट सीमित रह सकती है।

