मिडिल ईस्ट तनाव से अधिकांश देशों की अर्थव्यवस्था गड़बड़ा गई है। जहां भारत की अर्थव्यवस्था में सुदृढ़ता लाने के लिए केंद्र सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें चाबहार बंदरगाह परियोजना, आयात पर निर्भरता कम करना, निर्यात बढ़ाना, सप्लाई चेन मजबूत करना प्रमुख परियोजना है। यह परियोजना भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और क्षेत्रीय प्रभाव को बढ़ाने में मदद करेगी। भारत को आयात पर निर्भरता कम करने के लिए स्थानीय विनिर्माण पर जोर देना होगा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आंकड़ों पर आधारित निर्णय लेने होंगे। इसके अलावा भारत को नए निर्यात बाजारों की तलाश करनी होगी और भारतीय सामानों के लिए नए वैश्विक बाजार विकसित करने होंगे। भारत को सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए शॉर्ट, मीडियम, लॉन्ग टर्म प्लान बनाना होगा। युद्ध के तीव्र होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी व्यवधान आया है। ऐसे में भारत सरकार ने संकटग्रस्त व्यवसायों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 26.7 अरब डॉलर या लगभग 25 लाख करोड़ रुपए के ऋणोंं पर सरकारी ऋण गारंटी देने की योजना भी बनाई है। यह योजना आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ईसीजीएलएस) का ही एक रूप है और चार वर्षों के लिए वैध होगी। इस योजना के तहत राष्ट्रीय ऋण गारंटी न्यासी कंपनी (एनसीजीटीसी) की ओर से ऋणों पर 90 प्रतिशत ऋण गारंटी प्रदान की जाएगी और ऋणधारक की ओर से ऋण चुकाने में चूक होने की स्थिति में नुकसान की भरपाई की जाएगी। जहां इस संकट के कारण, कपड़ा और कांच निर्माताओं जैसे व्यवसायों को भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि वे मुख्य रूप से निर्यात पर निर्भर हैं। 174 अरब डॉलर के बढ़ते भारतीय कपड़ा उद्योग को कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, कच्चे माल की बढ़ती लागत, सुस्त मांग और श्रमिकों के पलायन की एक नई लहर जैसी प्रमुख चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

