Sunday, June 28, 2026 |
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1 अप्रैल से डिजिटल पेमेंट में बड़ा बदलाव, आरबीआई ने 2-स्तरीय सुरक्षा अनिवार्य की

by Business Remedies
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RBI's view on implementing 2-tier security in digital payments

भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक बड़ा फैसला लिया है। 1 अप्रैल 2026 से देश में यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और मोबाइल वॉलेट के माध्यम से किए जाने वाले सभी डिजिटल लेनदेन पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया जाएगा। इस नए नियम के लागू होने से अब केवल ओटीपी के आधार पर भुगतान पूरा नहीं किया जा सकेगा, बल्कि उपयोगकर्ताओं को दो स्तर की पहचान प्रक्रिया से गुजरना होगा। भारतीय रिजर्व बैंक के इस कदम का उद्देश्य बढ़ते ऑनलाइन धोखाधड़ी मामलों पर रोक लगाना है। हाल के समय में फिशिंग और सिम स्वैप जैसे मामलों में काफी वृद्धि हुई है, जहां केवल ओटीपी आधारित प्रणाली कमजोर साबित हुई है। नए नियम के तहत अब उपयोगकर्ताओं को ओटीपी के साथ-साथ पिन, पासवर्ड, बायोमेट्रिक पहचान या टोकन जैसी अतिरिक्त सुरक्षा प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

इस बदलाव का असर यह होगा कि डिजिटल भुगतान करने में थोड़ा अधिक समय लग सकता है, खासकर नए उपकरणों पर या अधिक राशि वाले लेनदेन में। हालांकि, जिन उपकरणों को पहले से विश्वसनीय माना गया है, उन पर सामान्य लेनदेन अपेक्षाकृत सुचारू रहेंगे। साथ ही, एक जोखिम-आधारित प्रणाली भी लागू की जाएगी, जिसमें लेनदेन के प्रकार और व्यवहार के आधार पर सुरक्षा जांच का स्तर तय किया जाएगा। इस नई व्यवस्था में बैंकों और भुगतान प्लेटफॉर्म की जवाबदेही भी बढ़ाई गई है। यदि किसी तकनीकी कमी के कारण धोखाधड़ी होती है, तो संबंधित वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों को क्षतिपूर्ति करनी पड़ सकती है। इससे ग्राहकों की शिकायतों का तेजी से समाधान होगा और बैंकों को अपनी सुरक्षा प्रणाली मजबूत करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

भारतीय रिजर्व बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि इसी प्रकार के प्रमाणीकरण नियम अंतरराष्ट्रीय लेनदेन, विशेष रूप से सीमा-पार कार्ड भुगतान पर भी लागू किए जाएंगे। इन नियमों का पूर्ण कार्यान्वयन अक्टूबर 2026 तक किया जाएगा। डिजिटल भुगतान का उपयोग देश में तेजी से बढ़ रहा है और ऐसे में यह कदम सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अतिरिक्त सत्यापन प्रक्रिया उपयोगकर्ताओं के लिए थोड़ी असुविधा पैदा कर सकती है, लेकिन इससे धोखाधड़ी के जोखिम में काफी कमी आएगी और करोड़ों लोगों के दैनिक लेनदेन अधिक सुरक्षित बनेंगे।



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