Thursday, July 16, 2026 |
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पश्चिम एशिया संकट पर सरकार की तेज कार्रवाई की सराहना, उद्योग के लिए 12 बिंदुओं का एजेंडा जारी

सीआईआई ने आपूर्ति बाधाओं के बीच उद्योग और सरकार के समन्वय को बताया जरूरी, ऊर्जा लागत और लॉजिस्टिक्स दबाव पर चिंता

by Business Remedies
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Image representing the meeting between CII and the Indian government on the West Asia crisis

नई दिल्ली,

देश के प्रमुख उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए तेज और संतुलित कदमों की सराहना की है। संगठन ने कहा कि सरकार की सक्रिय और समन्वित रणनीति ने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, वहीं उद्योग जगत से भी जिम्मेदार और रचनात्मक योगदान देने की अपील की गई है।

सीआईआई के अनुसार वर्तमान स्थिति मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष की बाधा है, जिसका प्रभाव ऊर्जा लागत, परिवहन व्यवस्था और कार्यशील पूंजी चक्र पर पड़ रहा है। हालांकि सरकार के कदमों ने तात्कालिक जोखिमों को कम किया है, लेकिन बदलते हालात को देखते हुए सरकार और उद्योग के बीच निरंतर समन्वय आवश्यक है। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया समय पर, संतुलित और भरोसा देने वाली रही है। उन्होंने बताया कि यह रणनीति आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुचारू बनाए रखने, निर्यातकों को समर्थन देने, बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों से आम जनता को राहत देने और व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित रही है। उद्योग जगत इस पहल की मंशा और क्रियान्वयन दोनों की सराहना करता है। उन्होंने आगे कहा कि इन उपायों से महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने, औद्योगिक गतिविधियों को बनाए रखने और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में विश्वास को कायम रखने में मदद मिली है। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका की सुरक्षा भी सुनिश्चित हुई है।

सीआईआई ने उद्योग के लिए 12 बिंदुओं का एक कार्ययोजना प्रस्तुत किया है। इसमें कच्चे माल और ईंधन के लिए रणनीतिक भंडारण तैयार करना, मूल्य स्थिरता बनाए रखना, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों जैसे नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन में निवेश बढ़ाना शामिल है। इसके अलावा कंपनियों को एलपीजी के स्थान पर प्राकृतिक गैस और अन्य कुशल ऊर्जा विकल्पों को अपनाने, बड़े स्तर के खाद्य संचालन में ईंधन खपत कम करने, रोजगार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और लघु एवं मध्यम उद्योगों को समय पर भुगतान व बेहतर ऋण सुविधा देने की सलाह दी गई है।

संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि कंपनियां ऊर्जा दक्षता बढ़ाएं, जोखिम प्रबंधन को मजबूत करें, तकनीकी निवेश करें और खरीद प्रक्रियाओं में लचीलापन लाएं ताकि भविष्य में अचानक आने वाले बाहरी झटकों से बचा जा सके। सीआईआई ने कहा कि February 28 से शुरू हुए इस संकट के बाद सरकार ने ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने, निर्यात को बढ़ावा देने, बाजार को स्थिर रखने और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। व्यापार के क्षेत्र में सरकार ने निर्यातकों को सहायता देने के लिए विभिन्न योजनाओं को बहाल किया है और माल ढुलाई व बीमा से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष उपाय किए हैं। इससे विशेष रूप से लघु उद्योगों को मजबूती मिली है।



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