New Delhi,
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह नियंत्रण में है और कहीं भी किसी प्रकार की कमी नहीं है। सरकार के अनुसार सभी खुदरा ईंधन केंद्रों पर पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और बिना किसी बाधा के ईंधन की आपूर्ति की जा रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पांचवां सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक है, जिसके कारण देश में ईंधन की उपलब्धता संरचनात्मक रूप से मजबूत बनी हुई है। ऐसे समय में जब कई देश “राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल” घोषित कर रहे हैं या राशनिंग जैसे कदम उठा रहे हैं, भारत को ऐसी किसी भी व्यवस्था की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार को “जानबूझकर शरारतपूर्ण” बताया है। मंत्रालय के अनुसार कुछ स्थानों पर पेट्रोल पंपों पर भीड़ की घटनाएं फर्जी वीडियो के कारण हुईं, न कि किसी वास्तविक कमी के कारण। तेल कंपनियों के डिपो पूरी रात कार्य करते रहे ताकि सभी पंपों पर पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे। हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के बावजूद भारत को अपने 41 से अधिक वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं से पहले की तुलना में अधिक कच्चा तेल प्राप्त हो रहा है। पश्चिमी देशों से आने वाली बड़ी मात्रा ने किसी भी कमी की भरपाई कर दी है और देश की सभी रिफाइनरियां वर्तमान में 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर कार्य कर रही हैं।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में केवल 6 दिन का भंडार होने के दावों के विपरीत भारत के पास कुल 74 दिनों की भंडारण क्षमता है, जबकि वर्तमान में लगभग 60 दिनों का वास्तविक भंडार उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, तैयार उत्पाद और भूमिगत रणनीतिक भंडारण शामिल हैं। अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की खरीद पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। एलपीजी नियंत्रण आदेश के बाद घरेलू रिफाइनरियों का उत्पादन 40 प्रतिशत बढ़कर प्रतिदिन 50 हजार मीट्रिक टन तक पहुंच गया है। यह देश की दैनिक जरूरत का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरा करता है, जिससे आयात पर निर्भरता घटकर केवल 30 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन रह गई है।
घरेलू उत्पादन के अलावा, अमेरिका, रूस और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों से 800 हजार मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति रास्ते में है। ये आपूर्ति 22 आयात टर्मिनलों पर पहुंचेगी, जो वर्ष 2014 की तुलना में दोगुनी क्षमता को दर्शाती है। इससे एक महीने की अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित हो चुकी है। तेल कंपनियां प्रतिदिन 50 लाख से अधिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति कर रही हैं। हालांकि घबराहट के कारण मांग एक समय 89 लाख सिलेंडर तक पहुंच गई थी, लेकिन अब यह फिर से 50 लाख के सामान्य स्तर पर आ गई है। जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए वाणिज्यिक आपूर्ति 50 प्रतिशत स्तर पर बनाए रखी गई है।
सरकार ने यह भी बताया कि पाइप्ड प्राकृतिक गैस का विस्तार एक दीर्घकालिक रणनीति है, जिसका उद्देश्य स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना है। देश में पाइप गैस कनेक्शन 25 लाख से बढ़कर 1.5 करोड़ से अधिक हो चुके हैं और अब 300 से अधिक भौगोलिक क्षेत्रों में इसकी पहुंच हो गई है। स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार की कमी को रोकने के लिए तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंप संचालकों के लिए ऋण सीमा को 1 दिन से बढ़ाकर 3 दिन से अधिक कर दिया है, जिससे वे अधिकतम भंडार बनाए रख सकें। पेट्रोलियम मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि आवश्यक वस्तुओं को लेकर झूठी जानकारी फैलाना एक दंडनीय अपराध है। जो लोग लॉकडाउन या आपातकाल जैसे झूठे दावे फैलाकर लोगों में डर पैदा कर रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

