New Delhi,
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत तेजी से खुद को वैश्विक इलेक्ट्रो-तकनीक निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य ऊर्जा आत्मनिर्भरता हासिल करना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत जिस गति से स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसे देखकर अन्य उभरते देश भी इस मॉडल को अपनाने पर ध्यान दे रहे हैं।
सस्ती सौर ऊर्जा और बैटरी के सहारे औद्योगिक विकास
रिपोर्ट के अनुसार भारत पारंपरिक जीवाश्म ईंधन के रास्ते को छोड़कर सस्ती सौर ऊर्जा और बैटरी के माध्यम से औद्योगिक विकास का नया मार्ग तैयार कर रहा है। यह पश्चिमी देशों और चीन द्वारा अपनाए गए पुराने मॉडल से अलग रणनीति है, जिसमें कोयले और अन्य जीवाश्म ईंधनों पर अधिक निर्भरता रही। वर्ष 2025 तक भारत अपनी कुल बिजली उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत सौर ऊर्जा से प्राप्त कर रहा है। इसके साथ ही प्रति व्यक्ति कोयले का उपयोग भी काफी कम है और देश धीरे-धीरे कोयला आधारित ऊर्जा उत्पादन के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में प्रति व्यक्ति सड़क परिवहन में तेल की खपत लगभग 96 लीटर है, जो समान विकास स्तर पर चीन की तुलना में आधी है। आने वाले समय में इसके अधिक बढ़ने की संभावना भी कम मानी जा रही है।
इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में तेज़ प्रगति
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। कारों की कुल बिक्री में इनकी भागीदारी लगभग 5 प्रतिशत के करीब पहुंच रही है। वहीं तीन पहिया वाहनों के मामले में भारत विश्व में अग्रणी है, जहां इलेक्ट्रिक मॉडल लगभग 60 प्रतिशत बाज़ार पर कब्जा कर चुके हैं। अंतिम ऊर्जा खपत में अब बिजली की हिस्सेदारी करीब 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो समान आय स्तर पर चीन के बराबर है और विकसित देशों को भी टक्कर दे रही है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जब चीन ने प्रति व्यक्ति 1500 किलोवाट घंटा बिजली खपत का स्तर पार किया था, तब कोयला सौर ऊर्जा की तुलना में 10 गुना सस्ता था। लेकिन आज भारत में सौर ऊर्जा और भंडारण की संयुक्त लागत नए कोयला संयंत्रों की तुलना में आधी रह गई है। सरकारी नीतियों के समर्थन से देश में निर्माण क्षेत्र में भी तेज़ वृद्धि देखी जा रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पिछले एक दशक में लगभग छह गुना बढ़कर 130 अरब डॉलर (लगभग 10.8 लाख करोड़ रुपये) तक पहुंच गया है। यही उद्योग इलेक्ट्रो-तकनीक क्षेत्र का आधार बन रहा है। स्मार्टफोन निर्माण के दौरान विकसित क्षमताएं अब सौर पैनल, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण में भी उपयोग हो रही हैं।
सौर और बैटरी उत्पादन में आत्मनिर्भरता
देश में सौर मॉड्यूल उत्पादन 12 गुना बढ़कर 120 गीगावाट तक पहुंच गया है, जो आत्मनिर्भरता के लिए पर्याप्त है। वहीं सेल निर्माण, जो एक दशक पहले लगभग नहीं के बराबर था, अब 18 गीगावाट तक पहुंच चुका है। बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण भी तेजी से इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रो-तकनीक की आपूर्ति करने के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

