नई दिल्ली,
अग्रणी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी आईबीएम ने गुरुवार को भारत में अपना पहला अवसंरचना नवाचार केंद्र शुरू करने की घोषणा की। यह केंद्र कंपनी के नए इंडिया सिस्टम्स डेवलपमेंट लैब परिसर में स्थापित किया गया है। संगम अवसंरचना नवाचार केंद्र भारत को उन्नत अवसंरचना इंजीनियरिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में मजबूत करने की दिशा में आईबीएम का रणनीतिक निवेश दर्शाता है। यह केंद्र घरेलू तथा वैश्विक बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है।
यह केंद्र एक सहयोगात्मक इंजीनियरिंग हब के रूप में कार्य करेगा, जहां आईबीएम के सिस्टम आर्किटेक्ट और अवसंरचना विशेषज्ञ मिलकर ग्राहकों, स्वतंत्र सॉफ्टवेयर विक्रेताओं, वैश्विक सिस्टम एकीकर्ताओं, वैश्विक क्षमता केंद्रों तथा अन्य भागीदारों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित समाधान तैयार करेंगे। हाइब्रिड क्लाउड क्षमताओं, उन्नत अवसंरचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाधान को एक ही स्थान पर एकीकृत कर यह केंद्र सुरक्षित और विस्तार योग्य एंटरप्राइज कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों के विकास और तैनाती की प्रक्रिया को तेज करेगा।
आईबीएम इंडिया एवं दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक संदीप पटेल ने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता यात्रा के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और अवसंरचना यह तय करेगी कि संगठन कितनी तेजी और किस पैमाने पर नवाचार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न उद्योगों में भारतीय उद्यम अपने मिशन-क्रिटिकल सिस्टम को आधुनिक बना रहे हैं ताकि वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए तैयार हो सकें। पटेल ने कहा कि यह केंद्र भारत के प्रति आईबीएम की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है और स्थानीय स्तर पर अवसंरचना समाधान डिजाइन, निर्माण और विस्तार करने की क्षमता को मजबूत करता है, साथ ही वैश्विक नवाचार में योगदान भी सुनिश्चित करता है।
आईबीएम इंडिया सिस्टम्स डेवलपमेंट लैब की उपाध्यक्ष सुभाथ्रा श्रीनिवासराघवन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता उतनी ही प्रभावी होती है जितनी मजबूत उसे समर्थन देने वाली अवसंरचना होती है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र गहन सिस्टम इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और भागीदारी सहयोग को जोड़ते हुए ग्राहकों को बड़े पैमाने पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लागू करने में मदद करेगा, साथ ही प्रदर्शन, सुरक्षा, प्रशासन और विश्वसनीयता सुनिश्चित करेगा। आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू द्वारा पिछले वर्ष किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि भारत के 58 प्रतिशत संगठनों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती मांग के कारण अवसंरचना निवेश बढ़ाया है। अध्ययन के अनुसार वर्ष 2025 में अवसंरचना बजट में 19 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जबकि 43 प्रतिशत संगठन कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र स्थापित कर चुके हैं या इसकी योजना बना रहे हैं।

