बिजनेस रेमेडीज / नई दिल्ली (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल-दिसम्बर) में भारत का राजकोषीय घाटा 8.55 लाख करोड़ रुपए रहा, जो चालू वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य का 54.5 प्रतिशत है। यह जानकारी वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए ताजा आंकड़ों में दी गई। पिछले वर्ष की इसी अवधि में राजकोषीय घाटा पूरे वर्ष के लक्ष्य का 56.7 प्रतिशत था। चालू वित्त वर्ष में सरकार की कुल प्राप्तियां 25.25 लाख करोड़ रुपए रही, जो पूरे साल के लक्ष्य का 72.2 प्रतिशत है, जबकि कुल व्यय 33.81 लाख करोड़ रुपए हुआ, जो बजट लक्ष्य का 66.7 प्रतिशत बनता है। पिछले वर्ष में इस अवधि में प्राप्तियां 72.3 प्रतिशत और व्यय 67 प्रतिशत था।
इस अवधि के दौरान शुद्ध कर प्राप्तियां 19.4 लाख करोड़ रुपए रही, जो पिछले साल के इसी समय में मिले 18.4 लाख करोड़ रुपए से अधिक हैं। वहीं, गैर-कर राजस्व बढ़कर 5.4 लाख करोड़ रुपए हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 4.5 लाख करोड़ रुपए था। सरकार ने अर्थव्यवस्था और रोजगार पर फोकस करते हुए राजमार्गों, बंदरगाहों और रेलवे जैसी अवसंरचना परियोजनाओं पर पूंजीगत व्यय 7.9 लाख करोड़ रुपए किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 6.9 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर है।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों को करों के हिस्से के रूप में 10,38,164 करोड़ रुपए हस्तांतरित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 1,37,014 करोड़ रुपए अधिक हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025-26 में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य जीडीपी का 4.4 प्रतिशत निर्धारित किया है, जो 15.7 लाख करोड़ रुपए बनता है। यह सरकार की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें घाटे में कमी लाकर देश की राजकोषीय स्थिति को मजबूत करना शामिल है। संशोधित अनुमान के अनुसार, 2024-25 में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8 प्रतिशत था। विश्लेषकों के अनुसार, राजकोषीय घाटे में कमी से अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत होती है, मूल्य स्थिरता बनी रहती है और विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। इससे सरकारी उधार लेने की आवश्यकता कम होती है, जिससे बैंकों के पास कॉरपोरेट और उपभोक्ताओं को ऋण देने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है।

