आम बजट-2026 वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman की ओर से 1 फरवरी रविवार को पेश किए जाने की पूरी उम्मीद है। यह 2026-27 वित्तीय वर्ष के लिए होगा, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर (सडक़ें, रेलवे), राजकोषीय घाटे को कम करने और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर मुख्य फोकस रहने की उम्मीद है। साथ ही Trump टैरिफ और अन्य वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह महत्वपूर्ण है। बजट की तैयारियों में सरकारी महकमा पूरी तरह से जुटा हुआ है, व्यापारियों और नीति विशेषज्ञों से सुझाव भी मांगे जा रहे हैं।
इस बार के बजट में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की संभावना है, जो देश की आर्थिक स्थिति और विकास को प्रभावित करेंगी। बजट में राजकोषीय घाटा 4.3 फीसदी रहने का अनुमान है, जो वैश्विक चुनौतियों के बीच एक महत्वपूर्ण कदम है। वहीं रक्षा बजट में 9-10 फीसदी की वृद्धि हो सकती है, जिससे यह 7.4 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच सकता है। कैपिटल एक्सपेंडिट में 10-15 फीसदी की वृद्धि हो सकती है, जिससे यह 12 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपए तक की आय को टैक्स-फ्री करने की संभावना है। होम लोन और स्वास्थ्य बीमा पर कटौती की सीमा बढ़ाने की पूरी उम्मीद है। जहां इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश की संभावना है, जिसमें सडक़, रेलवे और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।
बजट में टैक्स छूट, कृषि, और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस रहने की उम्मीद है, जिसमें एफडी ब्याज पर टीडीएस में छूट, वरिष्ठ नागरिकों के लिए पचास हजार से बढ़ाकर 1 लाख रुपए तक की छूट और सेक्शन 80C की लिमिट बढ़ाने की संभावना है। साथ ही कृषि बजट में वृद्धि, MSME को बढ़ावा और विकसित भारत के लिए डिजिटल व इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जाएगा।
हालांकि बड़े टैक्स कट की उम्मीद कम है, लेकिन सिस्टम को आसान बनाने पर ध्यान रहेगा। दाल, तेल, दूध जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे मिडिल क्लास प्रभावित हो सकता है। वहीं बजट में टैक्स छूट से ज्यादा सिस्टम में सुधार, डिजिटल और कृषि क्षेत्रों पर ध्यान और बुनियादी ढांचे पर खर्च को प्राथमिकता मिलने की उम्मीद है, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और आम आदमी को अप्रत्यक्ष रूप से फायदा हो।

