Thursday, August 13, 2026 |
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आस्था और सृजन की शक्ति का प्रतीक है सोमनाथ मंदिर

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सोमनाथ… यह शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में प्रभास पाटन स्थित सोमनाथ भारत के आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतीकरण है। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ का स्थान सबसे पहले होता है।
दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बनता रहा। वर्ष 2026 सोमनाथ मंदिर के लिए बहुत महत्व रखता है, क्योंकि इस महान तीर्थ पर हुए पहले आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे हो गये हैं। जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण कर उसे ध्वस्त कर दिया था। यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया हिंसक और बर्बर प्रयास था। सोमनाथ हमला मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में शामिल है।
उस दौरान क्रूरता और विध्वंस का वर्णन अनेक ऐतिहासिक स्रोतों में विस्तार से मिलता है, जिनकी पीड़ा की अनुभूति आज तक होती है। फिर भी, एक हजार वर्ष बाद आज यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका। संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी है। 11 मई, 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण संपन्न हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति में वह ऐतिहासिक समारोह आयोजित हुआ, जब पुनर्निर्मित मंदिर को दर्शनों के लिए खोला गया।
वर्ष 1026 में शुरू हुई मध्यकालीन बर्बरता ने आगे चलकर दूसरों को भी बार-बार सोमनाथ पर आक्रमण के लिए उकसाने का काम किया। यह हमारे लोगों और हमारी संस्कृति को गुलाम बनाने का प्रयास था, पर हर बार जब भी मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे वीरों-वीरांगनाओं ने उसकी रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। पीढ़ी दर पीढ़ी हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुन: जीवंत किया। सोमनाथ की आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी। समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे।
महमूद गजनवी लूटकर चला गया, मगर सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका। सोमनाथ से जुड़ी हमारी आस्था, विश्वास और प्रबल हुआ। वर्ष 1026 के हजार साल बाद आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है। वह आज भी हमारी प्रेरणा का स्रोत है। हमारी शक्ति का पुंज है।



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