सशक्त, खुशहाल और आत्मनिर्भर भारत के सपने को पूरा करने के लिए आज श्रमिकों का सशक्तिकरण की बहुत जरूरत है। वर्तमान में करीब 90 फीसदी मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिन्हें सभी सामाजिक सुरक्षा आज तक प्राप्त नहीं हैं। देश में श्रमिक वर्ग की संख्या संगठित व असंगठित क्षेत्र में पचास करोड़ से ज्यादा है। पहली बार पिछले दिनों नए लेबर कोड लाकर संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के श्रमिकों और उनके परिवारों की सरकार ने सुध ली है। पहले श्रमिक वर्ग कई कानूनों के जाल में उलझे हुए थे। उन्हें सही मायने में आजादी दिलाने की दिशा में सरकार ने सकारात्मक पहल की है। इसके लिए सरकार ने 29 कानूनों को अब सिर्फ चार कोड में समाहित कर सरल करने की दिशा में पहल की है। इससे अब श्रमिकों को सम्मान के साथ सुरक्षा, सेहत और सहूलियत भी मिल सकेगी। इससे श्रमिकों को कई फायदे होने वाले हैं। इन कोड्स के लागू होने से श्रमिकों को समय पर वेतन मिलेगा, ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन मिलेगा और महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति मिलेगी। इसके अलावा, ग्रेच्युटी की लिमिट 20 लाख रुपए तक बढ़ाई गई है, जो टैक्स-फ्री रहेगी। इसके अलावा भारत में फॉर्मल जॉब्स की संख्या कम से कम 15 फीसदी बढ़ेगी, सोशल सेक्योरिटी कवरेज 85 फीसदी तक पहुंच जाएगा। बेरोजगारी में भी कमी आएगी और करीब 77 लाख नई नौकरियां भी आ सकती हैं। नया कानून पूरी तरह से लागू होने के बाद सभी मजदूरों को कानूनी न्यूनतम वेतन मिलेगा।

