Friday, July 24, 2026 |
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भारत की Semiconductor क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए कई योजनाएं

by Business Remedies
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भारत चिप के निर्माण में विश्व में प्रथम स्तर हासिल करने के लिए तेजी से काम कर रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत की सबसे छोटी चिप दुनिया में सबसे बड़ा बदलाव लाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दशक में भारत, अमेरिका और चीन जैसे चिप निर्माण महाशक्तियों के साथ बराबरी की स्थिति में पहुंचे। केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। इनमें इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन शामिल है। इस मिशन के तहत केंद्र सरकार ने सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए ७६ हजार करोड़ रुपए का प्रोत्साहन पैकेज भी दिया है। सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीक का हृदय हैं। ये स्वास्थ्य, परिवहन, संचार, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शक्ति देते हैं। जैसे-जैसे दुनिया डिजिटलाइजेशन और ऑटोमेशन की ओर बढ़ रही है। सेमीकंडक्टर आर्थिक सुरक्षा और रणनीतिक स्वतंत्रता का आधार बन गए हैं। वर्ष, 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन शुरू होने के बाद केवल चार वर्षों में भारत ने अपनी सेमीकंडक्टर यात्रा को विजन से वास्तविकता में बदल दिया है। अगस्त, 2025 में ही भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है, जब गुजरात के सानंद में देश की पहली एंड-टू-एंड पायलट लाइन सुविधा शुरू की गई। सेमीकंडक्टर कंपनी सीजी-सेमी से उम्मीद है कि इसी सुविधा से भारत का पहला मेड इन इंडिया चिप तैयार होगा। चिप की डिजाइन, पैकेजिंग और इसके निर्माण को लेकर भारत हर स्तर पर अपने सपनों को आकार दे रहा है ताकि आत्मनिर्भर बन सके। डिजाइन लिंक्ड इंसेटिव स्कीम के तहत 23 चिप डिजाइन प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है, जिससे स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स को सहयोग मिल रहा है। कई कंपनियां अब रक्षा, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रिक वाहन और ऊर्जा प्रणालियों के लिए भी उन्नत चिप्स बना रही हैं।



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