बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जल का कोई विकल्प नहीं है, जल है तो कल है। ऐसे में आने वाली पीढ़ी को पर्याप्त जल उपलब्ध कराने के लिए जल संरक्षण हम सबकी महत्ती जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जल की आवश्यकता को समझते हुए प्रदेशभर में विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) के अवसर पर वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान की शुरूआत की है। जन जागरूकता और सहभागिता इस अभियान की सफलता का आधार है। उन्होंने आह्वान किया कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़े, जिससे राजस्थान में पानी की कमी नहीं रहे तथा हमारा प्रदेश हरियालो राजस्थान बने।
शर्मा सोमवार को पुष्कर में वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तीर्थराज पुष्कर की इस पावन धरा पर पूरी दुनिया से पर्यटक आते हैं। यहां स्थित ब्रह्माजी का मंदिर और सावित्री माता का मंदिर विश्वभर में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान की शुरूआत गंगा दशहरा के अवसर पर की गई। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पृथ्वी पर गंगा मां का अवतरण हुआ था तथा सभी जलाशयों में स्वयं गंगा मां अवतरित होती हैं। प्राचीन ग्रंथों में भी मां गंगा को पुण्य सलिला, मोक्ष प्रदायिनी एवं महानदी कहा गया है।
शर्मा ने कहा कि राजस्थान में कम सतही जल के कारण भूजल पर दबाव बढ़ता जा रहा है। भूजल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण प्रदेश का लगभग 72 प्रतिशत भाग अतिदोहित श्रेणी में आ गया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में जल संरक्षण की परंपराएं सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा रही हैं। बावडिय़ां, जोहड़, तालाब, और कुंए जैसी संरचनाएं राजस्थान की जल संरक्षण परंपराओं का जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान के तहत जल संचय संरचनाओं का निर्माण, जल स्रोतों की साफ-सफाई, परंपरागत जलाशयों के स्वरूप को पुन: बहाल करना और जल संरक्षण के लिए जन जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस अभियान से जल संरक्षण अब एक जन आंदोलन बन रहा है। यह अभियान निश्चित तौर पर प्रदेश में जल संरक्षण में एक नई क्रांति लाएगा।
राजस्थान को पानी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना हमारा लक्ष्य: मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने राजस्थान की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को समझते हुए डेढ़ साल में पानी की निर्बाध आपूर्ति के लिए लगातार निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि रामजल सेतु लिंक परियोजना से प्रदेश के 17 जिलों के लोगों को पेयजल मिलेगा और लगभग 4.74 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इसी तरह, शेखावाटी अंचल में यमुना जल समझौता से क्षेत्र के लोगों को पानी की निर्बाध आपूर्ति मिलेगी। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी नहर, देवास परियोजना, माही बांध, सोम-कमला-अंबा सहित विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से राज्य में जल संचयन तथा पानी की उपलब्धता को बढ़ावा दिया जा रहा है। हम पानी के क्षेत्र में राजस्थान को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं।
45 हजार जल संरक्षण संरचनाओं का होगा निर्माण: शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए देशभर में ‘कैच द रेन’ अभियान प्रारंभ किया था। इस अभियान से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार ने ‘कर्मभूमि से मातृभूमि’ अभियान का शुभारंभ किया। इसके तहत प्रवासी राजस्थानी के योगदान से राज्य में अगले चार साल में लगभग 45 हजार जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अजमेर जिले में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के प्रथम चरण के अंतर्गत 13.51 करोड़ रुपये के 553 जल संग्रहण संरचनाओं तथा द्वितीय चरण के अंतर्गत 9 करोड़ 61 लाख रुपये की 176 जल संग्रहण संरचनाओं का वर्चुअली लोकार्पण किया।

