स्वस्थ, संतुलित और शांत जीवन पद्धति अपनाने के लिए आज दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। योग भारत की प्राचीन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक साधना है। योग दिवस का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में लोगों को योग के लाभों के प्रति जागरूक करना है। योग शरीर और चेतना के मिलन का प्रतीक है और इसके अभ्यास से स्वास्थ्य व कल्याण के अनेक लाभ मिलते हैं। भारत के लिए यह दिन सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि योग भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, योग भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न भाग है। योग नियमित रूप से करने से शरीर में लचीलापन, संतुलन, श्वास नियंत्रण और ऊर्जा बढ़ती है। यह तनाव घटाने, मानसिक शांति बढ़ाने, एकाग्रता सुधारने और जीवनशैली को संतुलित करने में सहायक माना जाता है। आज के भागमभाग जिंदगी में योग की उपयोगिता और बढ़ गई है क्योंकि यह बिना अधिक खर्च के घर, विद्यालय, कार्यालय या सार्वजनिक स्थानों पर किया जा सकता है। यह बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और कामकाजी लोगों सभी के लिए उपयोगी है, बशर्ते अभ्यास अपनी क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार किया जाए। इस 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग” रखी गई है। यह थीम बढ़ती उम्र में भी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य, लचीलापन और गतिशीलता बनाए रखने के महत्व पर जोर देती है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में योग दिवस का विचार रखा था। इसके बाद 11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने 177 देशों के समर्थन से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। यह माना जाता है कि 21 जून का दिन इसलिए चुना गया, क्योंकि यह उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है और योग परंपरा से गहराई से जुड़ा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का दुनिया भर में पहला आयोजन 21 जून, 2015 को किया गया, तब से लेकर हर वर्ष इसे स्वस्थता की कामना को लेकर मनाया जाता आ रहा है।

