नई दिल्ली | बिजनेस रेमेडीज | वैश्विक स्मार्टफोन बाजार अप्रैल-जून 2026 तिमाही में दबाव में रहा। मेमोरी चिप्स की कमी, उत्पादन लागत में लगातार बढ़ोतरी, भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक मांग के चलते दुनिया भर में स्मार्टफोन शिपमेंट में सालाना आधार पर 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Counterpoint Research की Market Monitor रिपोर्ट के अनुसार, यह वर्ष 2013 के बाद दूसरी तिमाही का सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई डाटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण मेमोरी चिप्स की उपलब्धता कम हुई, जिसका सीधा असर स्मार्टफोन उद्योग पर पड़ा।
मेमोरी चिप्स की कमी बनी सबसे बड़ी वजह
रिपोर्ट के अनुसार, स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख मेमोरी तकनीकों DRAM (Dynamic Random Access Memory) और NAND (Not AND Flash Memory) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई। DRAM वह तेज मेमोरी है, जो फोन में एक साथ कई ऐप और प्रक्रियाओं को चलाने में मदद करती है, जबकि NAND Flash Memory का उपयोग फोटो, वीडियो, ऐप्स और अन्य डाटा को स्थायी रूप से स्टोर करने के लिए किया जाता है। एआई डाटा सेंटरों की बढ़ती मांग के कारण इन चिप्स की आपूर्ति सीमित रही, जिससे स्मार्टफोन निर्माताओं की लागत बढ़ गई।
महंगे हुए स्मार्टफोन, मांग पर पड़ा असर
मेमोरी चिप्स महंगे होने से कंपनियों की Bill of Materials (BOM) यानी एक स्मार्टफोन बनाने की कुल लागत बढ़ गई। इसका असर विशेष रूप से एंट्री और मिड-रेंज स्मार्टफोन पर देखने को मिला, जहां कई कंपनियों को बार-बार कीमतें बढ़ानी पड़ीं। बढ़ी हुई कीमतों के कारण कीमत के प्रति संवेदनशील उपभोक्ताओं की खरीदारी प्रभावित हुई और वैश्विक शिपमेंट में गिरावट दर्ज की गई।
सैमसंग नंबर-1, एप्पल की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर
रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही में Samsung ने 24 फीसदी वैश्विक बाजार हिस्सेदारी के साथ फिर से दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन ब्रांड बनने का स्थान हासिल किया। India और Middle East में बेहतर उत्पाद उपलब्धता, सीमित मूल्य वृद्धि और आक्रामक प्रमोशनल ऑफर्स ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी। वहीं, Apple की शिपमेंट में सालाना आधार पर 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और उसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़कर रिकॉर्ड 20 फीसदी पर पहुंच गई। तिमाही के दौरान प्रमुख कंपनियों में Apple एकमात्र ऐसा ब्रांड रहा जिसने स्मार्टफोन की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की।
2027 तक बनी रह सकती है चुनौती
Counterpoint Research की वरिष्ठ विश्लेषक Shilpi Jain के अनुसार, जो समस्या पहले केवल कॉम्पोनेंट्स की उपलब्धता तक सीमित थी, वह अब मांग को प्रभावित करने वाला बड़ा संकट बन चुकी है। Middle East में भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल और शिपिंग लागत में बढ़ोतरी, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, महंगाई और कमजोर उपभोक्ता विश्वास ने स्मार्टफोन बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 14 फीसदी की गिरावट आ सकती है और मेमोरी चिप्स की कमी का असर 2027 तक जारी रहने की संभावना है।

