Friday, July 31, 2026 |
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मारुति सुजुकी ने गुजरात में शुरू किया चौथा प्लांट

कंपनी नए प्लांट में अपनी पहली बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल ई-विटारा का निर्माण करेगी

by Business Remedies
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मारुति सुजुकी ने गुजरात में शुरू किया चौथा प्लांट
कंपनी नए प्लांट में अपनी पहली बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल ई-विटारा का निर्माण करेगी
हंसलपुर संयंत्र कंपनी के लिए प्रमुख एक्सपोर्ट हब भी बन चुका है।
नई दिल्ली | बीआर न्यूज नेटवर्क
मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड ने गुजरात के हंसलपुर स्थित अपने चौथे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है। नए प्लांट के शुरू होने के साथ हंसलपुर परिसर की वार्षिक उत्पादन क्षमता बढक़र 10 लाख वाहनों तक पहुंच गई है। यह भारत का सबसे बड़ा सिंगल-लोकेशन पैसेंजर व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स बन गया है। कंपनी नए प्लांट में अपनी पहली बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल (बीईवी) ई-विटारा का निर्माण करेगी।
हंसलपुर स्थित संयत्र की बढ़ी उत्पादन क्षमता
नए प्लांट के शुरू होने से हंसलपुर संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 7.5 लाख यूनिट से बढक़र 10 लाख यूनिट हो गई है। कंपनी के अनुसार, यह सुजुकी का दुनिया का पहला ऐसा मैन्युफैक्चरिंग परिसर है जहां एक ही स्थान पर हर साल 10 लाख वाहनों का उत्पादन किया जा सकता है। इसके साथ ही मारुति सुजुकी की देशभर में कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता बढक़र 29 लाख वाहनों तक पहुंच गई है।
ई-विटारा से इलेक्ट्रिक बाजार में एंट्री
मारुति सुजुकी नए प्लांट में शुरुआत में अपनी पहली बैटरी इलेक्ट्रिक व्हीकल ई-विटारा का उत्पादन करेगी। इसके जरिए कंपनी भारत के तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल बाजार में अपनी मजबूत शुरुआत करने की तैयारी कर रही है। हंसलपुर प्लांट में फिलहाल फ्रॉन्क्स, बलेनो, स्विफ्ट और ई-विटारा जैसे मॉडल बनाए जा रहे हैं।
25 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश
कंपनी ने हंसलपुर परियोजना में अब तक 25,288.7 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिसमें नए प्लांट पर करीब 3,900 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। हंसलपुर संयंत्र कंपनी के लिए प्रमुख एक्सपोर्ट हब भी बन चुका है। वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी के कुल वाहन निर्यात का करीब 47 प्रतिशत हिस्सा इसी संयंत्र से किया गया।
ग्रीन लॉजिस्टिक्स और स्किल डेवलपमेंट पर जोर
मारुति सुजुकी ने गुजरात प्लांट में टिकाऊ लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा दिया है। कंपनी ने मार्च 2024 में हंसलपुर संयंत्र में भारत की पहली इन-प्लांट रेलवे साइडिंग शुरू की थी। अब तक 7.5 लाख से अधिक वाहनों को रेल नेटवर्क के जरिए भेजा जा चुका है। इसके अलावा कंपनी ने मेहसाणा और गांधीनगर में जापान-भारत विनिर्माण संस्थान स्थापित किए हैं, जहां 1,200 से अधिक छात्रों को ऑटोमोबाइल क्षेत्र का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।



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