AI आधारित एग्री-स्टार्टअप्स बदल सकते हैं भारत की कृषि अर्थव्यवस्था: Dr. Jitendra Singh
नई दिल्ली | बिजनेस रेमेडीज | केंद्रीय राज्य मंत्री Dr. Jitendra Singh ने बुधवार को कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक और विज्ञान पर आधारित एग्री-स्टार्टअप्स भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे खेती की उत्पादकता बढ़ेगी, किसानों की आय में सुधार होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद जरूरी होगा। मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देना ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बेहद जरूरी होगा।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेजी से हुई बढ़ोतरी
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए Dr. Jitendra Singh ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हुआ है। वर्ष 2015 में जहां देश में लगभग 350 पंजीकृत स्टार्टअप थे, वहीं आज उनकी संख्या बढ़कर 2.3 लाख से अधिक हो गई है। इसके साथ ही भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि अब स्टार्टअप क्रांति का अगला चरण कृषि क्षेत्र से जुड़ा होना चाहिए। कृषि में नवाचार के जरिए सीधे किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है और ग्रामीण युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर भी तैयार किए जा सकते हैं। Dr. Jitendra Singh ने कहा कि यह धारणा बदलने की जरूरत है कि स्टार्टअप केवल सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र या बड़े शहरों तक सीमित हैं। उनके अनुसार, कृषि आज देश में उद्यमिता के सबसे बड़े अवसरों में से एक है। उन्होंने कहा कि कई बार औपचारिक शैक्षणिक योग्यता से अधिक महत्वपूर्ण व्यावहारिक ज्ञान, नवाचार की सोच और सीखने की इच्छा होती है। उन्होंने बताया कि सरकार के सहयोग, वैज्ञानिक संस्थानों और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म की मदद से अब आधुनिक तकनीकें ग्रामीण क्षेत्रों तक भी तेजी से पहुंच रही हैं।
कृषि में एआई की बढ़ती भूमिका पर दिया जोर
कृषि में एआई की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब फसलों के पूर्वानुमान आधारित प्रबंधन, सटीक सिंचाई (प्रिसिजन इरिगेशन), मौसम-आधारित सलाह और कृषि संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बनता जा रहा है। उन्होंने अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि केवल एआई-आधारित बेहतर प्रबंधन से ही प्रत्येक किसान हर साल करीब 5,000 रुपए तक की बचत कर सकता है, जिससे देश की कृषि अर्थव्यवस्था में लगभग 70,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त मूल्य जुड़ सकता है।
मंत्री ने आगे कहा कि Satellite तकनीक, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली, Drone-आधारित सर्वेक्षण, संसाधनों की मैपिंग और रियल-टाइम सलाह जैसी वैज्ञानिक प्रगति किसानों को बुआई, सिंचाई और फसल प्रबंधन से जुड़े बेहतर निर्णय लेने में मदद कर रही है। बेहतर मौसम पूर्वानुमान से किसान बदलते मानसून के अनुसार सही फसल का चयन कर सकते हैं, जिससे जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विज्ञान आधारित शोध पर जोर
जलवायु परिवर्तन को वैश्विक कृषि के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए Dr. Jitendra Singh ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय जलवायु के अनुकूल फसलों, Genomics, फसल सुधार, कीट-प्रतिरोधी किस्मों, Precision Farming और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे क्षेत्रों में व्यापक शोध को समर्थन दे रहा है|

