कुंजेश कुमार पतसारिया | विरासत के व्यवसाय को आधुनिक स्वरूप देकर ओरण के डायरेक्टर प्रदीप कुमार जाँगिड़ ने अपनी अलग पहचान कायम की है। उनका जुनून था कि लोगों तक व्यंजनों का ऐसा आसान और झटपट तरीका ढूंढा जाए, जो उनके पास अतिशीघ्र पहुंच सके। इन खाद्य पदार्थों को रेडी टू ईट की श्रेणी में लाया जाए। इससे लोगों की व्यस्त जीवनशैली में स्वास्थ्य और संस्कृति से जुड़ाव बना रहे। इन्होंने इसी उद्देश्य को लेकर शुद्धता, परंपरा और स्वाद से प्रेरित होकर यह व्यवसाय शुरू किया ताकि राजस्थानी खाने की विशेषता और विरासत को हर घर तक पहुंचाया जा सके। आज प्रदीप कुमार ने इसमें सफलता भी अर्जित की है। काफी लोग इनके खाने के चेहते भी हो गए हैं।
आपकी शैक्षणिक गतिविधियों को बताएं। कहां से शिक्षा ग्रहण की और कहां तक की है?
मैंने जयपुर से ही एमबीए (फाइनेंस) करने के बाद 12 वर्ष राष्ट्रीयकृत बैंक में सेवा दी। इसके बाद राजस्थानी शाकाहारी भोजन में अपनी रूचि के कारण यह नया व्यवसाय शुरू किया ।
व्यवसाय करने की प्रेरणा आपको कहां से मिली? इसका अनुभव कहां से लिया और व्यवसाय में किस तरीके की सेवाएं देते हैं?
व्यवसाय शुरू करने की प्रेरणा मुझे राजस्थान की पारंपरिक खाद्य संस्कृति, स्वस्थ और स्वादिष्ट व्यंजनों की विविधता से मिली है, जो ना केवल पौष्टिक है बल्कि हमारे पर्यटन व त्योहारों में भी अहम भूमिका निभाते हैं ।
यहां की खान-पान शुद्धता, स्वास्थ्यवर्धकता और अलग स्वाद के कारण देश-विदेश में लोकप्रिय है, लेकिन सीमित दायरे में ही रह गया है। इसलिए मैंने सोचा कि इस विरासत को आधुनिक स्वरूप देकर लोगों तक आसान और झटपट पहुंचाने का तरीका ढूंढा जाए। मैंने महसूस किया कि अगर इन व्यंजनों को तैयार खाद्य (रेडी टू ईट) श्रेणी में लाया जाए तो ना सिर्फ पारंपरिक स्वाद लोगों तक पहुंचेगा बल्कि व्यस्त जीवनशैली में भी स्वास्थ्य और संस्कृति से जुड़ाव बना रहेगा। शुद्धता, परंपरा और स्वाद से प्रेरित होकर यह व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि राजस्थानी खाने की विशेषता और विरासत को हर घर तक पहुंचाया जा सके। रेडी टू ईट फूड सेटअप में मेरा अनुभव बहुत ही सीखने वाला और चुनौतीपूर्ण रहा है। शुरुआत में उत्पाद की गुणवत्ता और स्वाद को बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी, साथ ही समय की बचत और ताजगी कैसे बरकरार रहे? इस पर विशेष ध्यान देना पड़ा। इस व्यवसाय में मार्केट रिसर्च, गुणवत्ता नियंत्रण, किचन संचालन, पैकेजिंग टेक्नोलॉजी और डिलीवरी चेन को सही तरीके से करना बहुत जरूरी है। ग्राहक की पसंद के अनुसार प्रोडक्ट वैरायटी, हेल्थी ऑप्शन और स्थानीय स्वाद को नए रूप में प्रस्तुत करना सीखने योग्य रहा। Oranfoods मुख्यत: रेडी टू ईट राजस्थानी भोजन उपलब्ध कराता है, जिसमें दाल-बाटी चूरमा, कढ़ी, बेसन गट्टा, पंचमेल दाल, केर-सांगरी, आलू-प्याज पनीर, ड्राई फ्रूट चूरमा, कचरी चटनी, काजू पालक और भी कई विशेष राजस्थानी पकवान शामिल हैं। यह सेवाएं ग्राहकों को शुद्ध, स्वादिष्ट और पारंपरिक राजस्थानी खाना घर बैठे या कहीं भी आसानी से उपलब्ध कराने के उद्देश्य से दी जाती हैं, जिससे व्यस्त जीवनशैली में भी राजस्थानी स्वाद का आनंद लिया जा सके।
वर्तमान में प्रतिस्पर्धा के युग में आपके समक्ष कोई चुनौतियां सामने आई, अगर आई तो उसका समाधान किस तरह से किया?
उपभोक्ता नए ब्रांड पर भरोसा करने में संकोच करते हैं, खासकर खाना-पीना से जुड़ी चीजों में। ऐसे में उन तक अपनी पहुंच बनाने में बहुत प्रयास करना पड़ता है। साथ में उच्च प्रतिस्पर्धा-बाजार में कई established कंपनियां के बीच नए आगंतुक का अपनी पहचान बनाना मुश्किल, गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा-खाने की गुणवत्ता, शेल्फ लाइफ और सेफ्टी बनाए रखना, विनियामक अनुपालन- खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करना, लॉजिस्टिक्स और वितरण-संभालना जटिल होता है। उच्च आरंभिक लागत-मशीनरी, पैकेजिंग, कच्चे माल, मार्केटिंग आदि में निवेश करना, नवाचार और उपभोक्ता की बदलती जरूरतों के मुताबिक उत्पादों का निरंतर विकास और अनुकूलन है। ये सभी कारक नए रेडी टू ईट फूड स्टार्टअप्स के लिए सफल होने की राह में बाधाएं हैं, जिनका समाधान सही योजना, नवाचार और धैर्य से संभव है। हमने अभी तक नवाचार, रिसर्च एवं ट्रायल में सफलता प्राप्त की है और अब आने ब्रांड बिल्डिंग एण्ड रेस्टोरेंट चैन पे काम कर रहे हैं।
सामाजिक सरोकार के कोई कार्य किए हो तो बताएं?
वर्तमान में शेखावटी परिवार समिति से जुड़ा हूं। समय-समय पर हम गरीब और आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों को सहयोग और मदद करने का यथा शक्ति प्रयास करते है।
आपके आदर्श कौन हैं?
मेरे माता-पिता, गुरुजन से लेकर हर व्यक्ति जो स्व व्यवसाय को प्रोत्साहित करता है, हर वो व्यवसायी जो अपने मेहनत और लगन से परिवार, समाज को आगे बड़ा रहे हैं, सराहना योग्य और प्रेरणपुंज हैं।
भविष्य में व्यवसाय को कहां तक विस्तार देना चाहते हैं?
हमारा लक्ष्य है कि अगले तीन साल में राजस्थानी रेडी टू ईट फूड की पहुंच को सहज और पॉपुलर करें। अपने रेडी टू ईट ब्रांड “ओरण” की भी देश-विदेश में पहचान बनाएं। अपने रेस्टोरेंट व्यवसाय को भी स्ट्रॉंग करें। इस वर्ष के अंत तक जयपुर में हम पांच आउट्लेट कर लेंगे। इसके बाद पूरे देश-विदेश में आउट्लेट खोल पाएंगे, क्योंकि हम जरूरी सप्लाई चैन पहले ही उसी के अनुसार व्यवस्थित करके चल रहे हैं।
नए युवाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए क्या सुझाव देना चाहेंगे, जिससे वह अपने व्यवसाय को उत्तरोतर बढ़ा सकें?
हम भी शुरुआती दौर में ही है, फिर भी यही कहूंगा कि बिजनेस में कोई शॉर्टकट नहीं होता है। स्काई लिमिट है, लेकिन पैर जमीन से कभी भी नया छूटे। शुरू करने से पहले सोचें, विचारें, समझें और एक बार शुरू करने पर तीन साल बिजनेस को अपना सब कुछ दें। अच्छी टीम और सिस्टम बनाने पर फोकस करें।
सरकार से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं, ताकि आपके व्यवसाय को और गति मिल सके?
सरकार को दो बिन्दुओं पर थोड़ा और प्रयास करना होगा, पहला सरकारी स्कीम को सुगम, फास्ट और पेपरलेस बनाए। दूसरा नए मैन्युफैक्चरिंग बिजनेस के लिए CO- LEASED जमीन उपलब्ध कराए। इससे शुरुआती लागत और रेंट का भार कम हो सके। अगर युवा मैन्युफैक्चरिंग की तरफ आगे आएंगे तो बेरोजगारी भी दूर हो सकेगी।

