Friday, February 20, 2026 |
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भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मांग जनसंख्या स्तर पर अनिवार्य

by Business Remedies
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Yotta Data Services AI Data Center Infrastructure

नई दिल्ली, 
डिजिटल अर्थव्यवस्था के तेजी से विस्तार के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मांग अब वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य होती जा रही है। Yotta Data Services के सह-संस्थापक सुनील गुप्ता ने कहा कि जैसे मोबाइल डाटा और Unified Payments Interface पूरे देश में आम उपयोग बन गया, उसी तरह एआई का उपयोग भी उपभोक्ताओं और उद्योगों दोनों के लिए बड़े पैमाने पर सामान्य आवश्यकता बनने जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत के पास प्रतिभा, विविध भाषाएं, विशाल डाटा और बड़ी डिजिटल आबादी पहले से मौजूद है, लेकिन बड़े स्तर की ग्राफिक्स प्रोसेसर संरचना की कमी थी। अब यह कमी दूर की जा रही है और इसी से वास्तविक मांग सामने आ रही है।

एशिया का बड़ा एआई सुपरक्लस्टर तैयार होगा

योट्टा डाटा सर्विसेज ने 20,736 लिक्विड-कूल्ड NVIDIA ब्लैकवेल अल्ट्रा ग्राफिक्स प्रोसेसर तैनात करने की घोषणा की है। यह एशिया के सबसे बड़े एआई सुपरक्लस्टर में से एक होगा। इस परियोजना में 2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया जा रहा है और इसे अगस्त 2026 तक शुरू करने का लक्ष्य है। गुप्ता ने कहा कि पहले आपूर्ति तैयार कर मांग को सक्षम बनाया गया है। अब भारतीय मॉडल देश में ही प्रशिक्षित हो रहे हैं और जैसे-जैसे उद्योगों में एआई अपनाने की गति बढ़ेगी, कंप्यूट क्षमता सबसे महत्वपूर्ण कारक बनी रहेगी। कंपनी India AI Mission के तहत सरकार के साथ पंजीकृत है। इस मिशन के अंतर्गत सरकार उपयोग के आधार पर कंप्यूट क्षमता लेती है और उसे स्टार्टअप तथा संस्थानों जैसे IIT Bombay और Bhashini को उपलब्ध कराती है। मिशन में उपयोग हो रहे लगभग तीन-चौथाई ग्राफिक्स प्रोसेसर योट्टा की संरचना से आते हैं।

भारत में मांग नहीं, क्षमता की कमी थी

सुनील गुप्ता के अनुसार भारत में एआई की वास्तविक समस्या मांग नहीं बल्कि कंप्यूट शक्ति की कमी थी। कंपनी का उद्देश्य भारत से भारत के लिए और विश्व के लिए तकनीक तैयार करना है। इससे भारतीय स्टार्टअप को वैश्विक स्तर पर सेवाएं देने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में देश को करोड़ों की संख्या में ग्राफिक्स प्रोसेसर की आवश्यकता होगी ताकि विशाल जनसंख्या स्तर के एआई उपयोग पूरे किए जा सकें। देश में ही बड़े पैमाने की संरचना बनने से विदेशी सर्वर पर निर्भरता कम होगी और भारत तकनीक उपभोक्ता से तकनीक निर्माता बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।



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