नई दिल्ली,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई से मुलाकात के बाद कहा कि बातचीत में भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते कार्यों और देश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों तथा पेशेवरों के साथ गूगल के सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। यह मुलाकात भारत एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुई।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि यह मुलाकात बेहद सुखद रही और इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की तेज प्रगति तथा सरकार और गूगल के बीच गहरे सहयोग के अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने कहा कि भारत के कुशल युवाओं और तकनीकी विशेषज्ञों की क्षमता का उपयोग करके देश की स्थिति को इस क्षेत्र में और मजबूत किया जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान सुंदर पिचाई से मिलना प्रसन्नता का विषय रहा। उन्होंने बताया कि बातचीत में इस बात पर विचार हुआ कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता में क्या कार्य कर रहा है और इस क्षेत्र में गूगल किस प्रकार विद्यार्थियों और पेशेवरों के साथ मिलकर काम कर सकता है।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बाद में अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर बैठक की मुख्य झलकियां साझा कीं, जिनमें दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा के प्रमुख बिंदु दिखाई दिए। भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी तक किया जा रहा है। इस सम्मेलन में विश्वभर से नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, नवाचारकर्ता और सामाजिक संगठनों के सदस्य भाग ले रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग को मजबूत करने के लिए साझा मंच प्रदान करना है।
यह सम्मेलन वैश्विक दक्षिण में आयोजित पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय एआई सम्मेलन माना जा रहा है। यह आयोजन “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” की भारतीय सोच को दर्शाता है, जिसका अर्थ है सबका कल्याण और सबकी खुशहाली, और यह “मानवता के लिए एआई” के व्यापक वैश्विक सिद्धांत के अनुरूप है। सम्मेलन में 110 से अधिक देशों और 30 अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी हो रही है। लगभग 20 राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख तथा करीब 45 मंत्री इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। व्यापक भागीदारी यह संकेत देती है कि जिम्मेदार तरीके से कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास और उपयोग की दिशा में वैश्विक स्तर पर तेजी से सहमति बन रही है और भारत इन चर्चाओं के केंद्र में अपनी भूमिका स्थापित कर रहा है।

