नई दिल्ली,
भारत में 2025–26 सीजन के लिए गेहूं उत्पादन का अनुमान स्थिर और मजबूत बना हुआ है, जबकि मौसम से जुड़ी कुछ चुनौतियां भी सामने आईं। रविवार को केंद्र सरकार ने कहा कि हालात मिले-जुले रहे, लेकिन फसल ने अच्छी मजबूती दिखाई। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में मौसम के असर को लेकर चिंता जताई गई, लेकिन किसानों द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक कदम, समय पर बुवाई और मजबूत खरीद रुझान ने स्थिति को संभाले रखा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार गेहूं की बुवाई लगभग 33.4 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में हुई। जल्दी और समय पर बुवाई के कारण पिछले वर्ष की तुलना में रकबा बढ़ा, जिससे उत्पादन का आधार मजबूत हुआ। मंत्रालय ने बताया कि पूरे सीजन के दौरान किसी बड़े कीट हमले या रोग फैलने की सूचना नहीं मिली। फसल की अहम बढ़वार अवधि में खरपतवार का असर भी बहुत कम रहा, जिससे फसल की सेहत बेहतर बनी रही।
हालांकि सीजन पूरी तरह आसान नहीं रहा। फरवरी में सामान्य से अधिक तापमान रहने के कारण दाना भरने के चरण में गर्मी का दबाव देखा गया, जिससे कुछ क्षेत्रों में उपज पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा फसल पकने के समय बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण कुछ इलाकों में सीमित नुकसान हुआ। इससे कुछ स्थानों पर दाने की गुणवत्ता और उत्पादन प्रभावित हुआ। इन चुनौतियों के बावजूद सरकार का मानना है कि कुल उत्पादन का अनुमान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार इस बार अतिरिक्त 0.6 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में खेती हुई, जिससे स्थानीय नुकसान की भरपाई में मदद मिलेगी।
सरकार ने कहा कि जल्दी बुवाई अपनाने से फसल अंतिम चरण की गर्मी से काफी हद तक बची। इसके साथ बेहतर बीज बदलाव दर के कारण अधिक उपज देने वाली, मौसम सहनशील और रोगरोधी गेहूं किस्मों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इन नई किस्मों ने फसल को गर्मी और जैविक दबाव दोनों से बचाने में मदद की है, जिससे कुल उत्पादन को सहारा मिला है। खरीद के आंकड़े भी अच्छे संकेत दे रहे हैं। हरियाणा में मंडियों में गेहूं आवक सरकार के 75 लाख मीट्रिक टन लक्ष्य को पार कर चुकी है। अब तक 56.13 लाख मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से लगभग 9 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
मध्य प्रदेश में भी मजबूत उत्पादन दर्ज किया गया है। राज्य की मांग पर सरकार ने खरीद लक्ष्य को शुरुआती 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया है। महाराष्ट्र में भी गेहूं उत्पादन लगातार बढ़त दिखा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025–26 सीजन में राज्य का उत्पादन लगभग 22.90 लाख टन रहने का अनुमान है। कुल मिलाकर, बड़े कीट हमले का अभाव, मजबूत खरीद, बढ़ा हुआ रकबा और बेहतर बीज किस्में भारत के गेहूं उत्पादन अनुमान को मजबूती दे रही हैं।

