नई दिल्ली | बीआर नेटवर्क | भारत का पहला निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल-क्लास रॉकेट Vikram-1 शनिवार को Satish Dhawan Space Centre, Sriharikota से प्रक्षेपित किया गया। Vikram-1 ने अंतरिक्ष में अपनी तय कक्षा (ऑर्बिट) सफलतापूर्वक हासिल कर ली है। इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही भारत, निजी क्षेत्र में ऑर्बिटल लॉन्च (कक्षीय प्रक्षेपण) की क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है। इस रॉकेट को Skyroot Aerospace ने विकसित किया है। रॉकेट ने अपने अंतिम बर्न (ईंधन दहन चरण) को पूरा करते हुए पेलोड्स को पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित कर दिया।
पूरा रॉकेट मजबूत कार्बन-कंपोजिट से बना है
Vikram-1 पूरी तरह से हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना पहला ऑर्बिटल रॉकेट है। कार्बन फाइबर स्टील की तुलना में पांच गुना हल्का होता है। इससे रॉकेट का वजन कम हो जाता है, जिससे इसकी ईंधन दक्षता बढ़ जाती है। रॉकेट को ऊर्जा देने के लिए इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल दिया गया है।
1. तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज
इसे रॉकेट के नीचे लगे तीन बेहद ताकतवर ‘बूस्टर्स’ की तरह समझ सकते हैं, जिनमें ठोस ईंधन जैसे बारूद की तरह का ठोस केमिकल भरा होता है। रॉकेट को जमीन से उठाकर आसमान की तरफ धकेलने के लिए शुरुआत में बहुत भारी ताकत की जरूरत होती है। ये तीनों सॉलिड स्टेज एक-एक करके जलते हैं और रॉकेट को शुरुआती धक्का देकर अंतरिक्ष की सीमा लो अर्थ ऑर्बिट के पास पहुंचा देते हैं।
2. लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल
यह रॉकेट के ऊपरी हिस्से में लगा एक बेहद बारीक और स्मार्ट तरल ईंधन वाला छोटा इंजन होता है। जब रॉकेट अंतरिक्ष में पहुंच जाता है, तो वहां ठोस ईंधन काम नहीं आता क्योंकि उसे अपनी मर्जी से ऑन या ऑफ नहीं किया जा सकता। यहां ‘लिक्विड मॉड्यूल’ काम आता है। यह अंतरिक्ष में सैटेलाइट को सही दिशा देने, रॉकेट की रफ्तार कम-ज्यादा करने और सैटेलाइट को उसकी तय की गई कक्षा में ‘एडजस्ट’ यानी स्थापित करने का काम करता है।
बेहद आधुनिक रॉकेट है ‘Vikram-1’
Skyroot Aerospace का बनाया Vikram-1 एक बेहद आधुनिक रॉकेट है। यह अपने साथ 350 किलोग्राम तक का वजन लेकर अंतरिक्ष की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में जा सकता है। यह रॉकेट सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में उनकी सही जगह पर पहुंचाएगा, जिससे हमारे मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, नेविगेशन और मौसम की जानकारी जैसी सेवाओं को मजबूती मिलेगी। इस रॉकेट को बनाने में खास कार्बन बॉडी और 3D-printed लिक्विड इंजन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। अपने पहले मिशन में यह कई कस्टमर पेलोड को 450 किलोमीटर की कक्षा (ऑर्बिट) में स्थापित करेगा। इनमें Skyroot Aerospace का Scope सैटेलाइट, Digantara का DQubeD Technology Demonstration Payload, Grahaa Space का Solars S3 सैटेलाइट और Cosmoserve Space का Embrace रोबोटिक आर्म शामिल हैं, जिसे ऑर्बिटल मलबे को पकड़ने के लिए डिजाइन किया गया है।
कुछ खास पेलोड भी ले जाए जाएंगे
इस उड़ान में कुछ खास पेलोड भी ले जाए जाएंगे, जैसे Cosmic Bloom नाम की फूलों के आकार की कलाकृति और 18-कैरेट सोने का एक माइक्रो-रॉकेट, जिस पर वैज्ञानिक C. V. Raman, Vikram Sarabhai और A. P. J. Abdul Kalam की सूक्ष्म मूर्तियां बनी हुई हैं।

