केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष के लिए बजट बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। संभवत: एक या दो दिन में बजट पेश कर दिया जाएगा। इसके लिए वित्त मंत्रालय के अधिकारी और खुद वित्त मंत्री भी उद्योग जगत के विभिन्न क्षेत्र के प्रतिनिधियों से मिल रही हैं। इसी क्रम में रियल एस्टेट जगत ने भी अपनी मांगों को लेकर वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के सुझाव दिए हैं। यह क्षेत्र चाहता है कि रियल एस्टेट सेक्टर में वस्तु एवं सेवा कर या जीएसटी छूट का उचित लाभ अभी नहीं मिल पाता है। इसमें सुधार किया जाए। नेशनल रियल एस्टेट डवलपमेंट काउंसिल नारेडको के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी हरि बाबू का भी कहना है कि सरकार को किफायती और सस्टेनेबल आवास के लिए पहलों को प्राथमिकता देना जारी रखना चाहिए। सस्ते मकान का समर्थन करने वाली नीतियां आवास की कमी को पूरा करने के साथ ही सभी नागरिकों के लिए आवश्यक जीवन स्तर को सुनिश्चित करने में मदद करेंगी। इसके साथ ही सस्टेनेबल आवास को बढ़ावा देना वैश्विक रुझानों व मानको के अनुरूप है जो पर्यावरण संबंधी चिंताओं को हल करता है, जिससे भारत हरित विकास में अग्रणी बन सकता है। इसके अनुरूप वित्त मंत्रालय को आगामी केंद्रीय बजट में किफायती एवं मध्यम आय आवास के लिए विशेष विंडो के तहत 50,000 करोड़ रुपए की दूसरी सहायता और जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट की अनुमति देना और सभी के लिए आवास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किराये के आवास के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए। इसके अलावा
सभी नई परियोजनाओं के लिए आईटीसी से इनकार करने से आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है, क्योंकि खरीद पर पूरा जीएसटी डवलपर्स द्वारा वहन किया जाता है। इससे निर्माण की लागत बढ़ जाती है। इस वजह से नकदी प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और निर्माण की बढ़ी हुई लागत का अंतिम खामियाजा अंतिम ग्राहक को भुगतना पड़ता है। वहीं बजट में रियल एस्टेट सेक्टर को ग्रोथ और कार्य-कुशलता को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्व सुधारों की घोषणा की उम्मीद है।

