अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का टैरिफ बढ़ाने का जुनून धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। उन्होंने दूसरे कार्यकाल के करीब 130 दिनों में आए दिन कई देशों का टैरिफ बढ़ाने और कम करने का गीत ही अलापा है। पर अब उनके बढ़ते टैरिफ के अलाप और नीतियों को लेकर पिछले दिनों अमेरिकी कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन के कम से कम 180 कार्यकारी आदेशों और नीतियों पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी है। साथ ही ट्रम्प भी स्वयं 11 प्रमुख फैसलों पर यूटर्न लेते हुए पलट गए हैं। ट्रंप ने फेडरल फंडिंग फ्रीज, अंतरराष्ट्रीय छात्र वीसा और टैरिफ नीतियों जैसे फैसलों को कई बार बदला या वापस लिया है। अब तक ट्रंप प्रशासन के आदेशों के खिलाफ 250 से अधिक याचिका दायर की जा चुकी हैं। वहीं ट्रंप प्रशासन की बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में नीतियां लागू करने से कोर्ट में उन्हें चुनौती मिल रही हैं। इसके अतिरिक्त प्रोजेक्ट-2025 को लागू करना, जिसमें कानून व नियमों में बड़े स्तर पर बदलाव होने के चलते भी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। वहीं कभी ट्रंप के खासमखास रहे कारोबारी इलॉन मस्क ने भी ट्रंप से अलग होने का निर्णय ले लिया है। मस्क ने ही ट्रंप के चुनावी अभियान में करीब 2100 करोड़ रुपए का चंदा दिया था। इसके अलावा खुलेआम समर्थन दिया था। वैसे तो मस्क और ट्रंप के बीच विवाद की शुरुआत मार्च, 2025 में पेंटागन की मीटिंग में ही हो गई थी। मस्क अपना हित साधने के लिए चीन पर अमेरिका की खुफिया नीति, जिसमें वॉर प्लान तक शामिल हैं की जानकारी चाहते थे। इसे ट्रंप ने साझा करने से मना कर दिया था। देखना अब यह है कि ट्रंप प्रशासन की आगे की रणनीति क्या रहेगी, कई देशों से वह अलग-थलग से पड़ गए हैं।

