Sunday, July 26, 2026 |
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अमेरिका ने भारत पर शुल्क अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत करने की घोषणा की

by Business Remedies
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White House announcement on US tariff cut for India to 10 percent

Washington,

White House ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा घोषित नए global tariff order के बाद भारत पर लगने वाला आयात शुल्क अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत रहेगा। यह नया प्रावधान पहले लगाए गए उस आपात आर्थिक कानून आधारित शुल्क की जगह लागू होगा, जिसे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। White House के एक अधिकारी ने बताया कि 10 प्रतिशत की दर पहले लागू आपात आर्थिक शक्तियों के तहत लगाए गए शुल्क को प्रतिस्थापित करेगी। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक प्रशासन किसी अन्य कानूनी प्रावधान के माध्यम से अधिक उपयुक्त शुल्क दर लागू नहीं कर देता।

पहले 25 से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था

इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों के बीच अंतरिम trade agreement के ढांचे पर सहमति बनने के बाद अमेरिका ने भारत पर reciprocal tariff 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था। अब नए आदेश के बाद यह दर अस्थायी रूप से 10 प्रतिशत मानी जाएगी। White House ने यह भी स्पष्ट किया कि नया 10 प्रतिशत global tariff पहले से लगे शुल्क के अतिरिक्त नहीं है, बल्कि फिलहाल उसी की जगह लागू किया जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि भारत के साथ trade framework में मूल रूप से कोई परिवर्तन नहीं हुआ है और भारत को tariff देना होगा, जबकि अमेरिका को tariff नहीं देना पड़ेगा। उन्होंने इसे “fair deal” बताया। हालांकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह सवाल उठा था कि पहले बताई गई 18 प्रतिशत दर का क्या होगा। अब White House के स्पष्टीकरण से स्पष्ट है कि फिलहाल भारत पर लागू दर 10 प्रतिशत रहेगी।

आगे बढ़ सकती है शुल्क दर

ट्रम्प administration ने संकेत दिया है कि आने वाले सप्ताहों में अन्य कानूनी धाराओं के तहत अतिरिक्त कदम उठाए जा सकते हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि tariff दरें संभावित रूप से अधिक भी हो सकती हैं और यह इस पर निर्भर करेगा कि administration क्या तय करता है। उन्होंने यह भी बताया कि वैकल्पिक कानूनी प्रावधान पहले विकल्प से भी अधिक मजबूत हैं और भविष्य में पहले से ज्यादा trade duty लगाने की संभावना बनी हुई है। भारत और अमेरिका के बीच trade relations में समय-समय पर शुल्क और market access को लेकर मतभेद रहे हैं, जबकि defence, technology और Indo-Pacific क्षेत्र में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देशों की सरकारें trade imbalance और sectoral concerns को दूर करने के लिए बातचीत और tariff policy दोनों का उपयोग करती रही हैं।



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