नई दिल्ली,
Union Budget 2026 और India-US Trade Deal के बाद अब सभी की नजर Reserve Bank Of India की Monetary Policy Committee की तीन दिवसीय बैठक पर है, जो बुधवार से शुरू हो रही है। इस बैठक में शुक्रवार को Repo Rate पर अहम फैसला लिया जाएगा।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि RBI Governor संजय मल्होत्रा के नेतृत्व वाली समिति फिलहाल Policy Rate में और कटौती से विराम ले सकती है। केंद्रीय बैंक अब प्रत्यक्ष कदम उठाकर बाजार में तरलता, बॉन्ड स्थिरता और मुद्रा से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। गौरतलब है कि RBI फरवरी 2025 से अब तक Repo Rate में 125 आधार अंक की कटौती कर चुका है और वर्तमान दर 5.25 प्रतिशत पर है। विश्लेषकों का कहना है कि महंगाई दर में फिर से बढ़ोतरी की संभावना है, यहां तक कि 12 फरवरी से जारी होने वाली नई आधार वर्ष श्रृंखला में भी महंगाई का स्तर ऊंचा रह सकता है। ऐसे में आगे दरों में कटौती की गुंजाइश सीमित दिखाई दे रही है।
Yes Bank की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान Repo Rate 5.25 प्रतिशत और अनुमानित महंगाई लगभग 4 प्रतिशत रहने की स्थिति में वास्तविक दर 125 आधार अंक के आसपास बनती है, जो संतुलित स्तर माना जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI को फिलहाल विराम की नीति अपनानी चाहिए और रुख को “Neutral” बनाए रखना चाहिए, ताकि भविष्य में आर्थिक वृद्धि में गिरावट की स्थिति में उसके पास पर्याप्त विकल्प उपलब्ध रहें। डीबीएस Bank की कार्यकारी निदेशक और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार, इस तिमाही और अप्रैल-जून 2026 में भी बॉन्ड खरीद जारी रह सकती है। FY27 के Budget में रिकॉर्ड स्तर पर उधारी का प्रावधान किया गया है, ऐसे में केंद्रीय बैंक को धन बाजार संचालन में लचीला रुख अपनाना होगा ताकि उधारी लागत को नियंत्रित रखा जा सके।
हाल ही में RBI ने बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रणाली में प्रवाहित करेगा, जिससे नकदी दबाव कम किया जा सके। इसके तहत खुला बाजार बॉन्ड खरीद, विदेशी मुद्रा स्वैप और परिवर्तनीय दर Repo संचालन जैसे उपाय शामिल हैं। ये कदम मौजूदा तरलता और वित्तीय परिस्थितियों की समीक्षा के बाद उठाए गए हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि Repo Rate पर निर्णय के साथ-साथ RBI का रुख और भविष्य के संकेत भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। Stock Market Update पर भी इस फैसले का सीधा प्रभाव देखने को मिल सकता है, जहां Nifty और Sensex की दिशा मौद्रिक नीति के संकेतों पर निर्भर करेगी।

