मुंबई | BR News Network | अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा Generic दवाओं पर दो वर्ष बाद यानी 1 अगस्त, 2029 से 200 फीसदी टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद वर्ष 2028 से 100 फीसदी और फिर 200 फीसदी तक टैरिफ लगाया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि 1 अगस्त, 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी Generic दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। इस कारण से फार्मा शेयरों में बुधवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट देखने को मिली है और निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। इससे National Stock Exchange (NSE) का फार्मा कंपनियों का मुख्य सूचकांक Nifty Pharma 2 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया।
जेनेरिक के उत्पादन को अमेरिका में वापस लाना उद्देश्य
Donald Trump ने कहा कि इस नीति का उद्देश्य Generic दवाओं के उत्पादन को अमेरिका में वापस लाना है। उन्होंने कहा कि कंपनियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अमेरिका में अपने उत्पादन संयंत्र और उपकरण स्थापित करने का अवसर दिया जाएगा। जो कंपनियां ऐसा नहीं करेंगी, उन्हें बढ़े हुए टैरिफ के रूप में दंड का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि Patent, Branded और Innovative दवाओं पर मौजूदा नीति में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा और यह पहले की तरह लागू रहेगी। इस नीति का उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के हितों की रक्षा करना और देश में दवा निर्माण को बढ़ावा देना है।
लागत और मुनाफे पर पड़ सकता है दबाव
अमेरिकी बाजार में मजबूत मौजूदगी रखने वाली भारतीय दवा कंपनियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा है। निवेशकों को आशंका है कि भविष्य में अमेरिका में दवाओं के निर्यात पर बढ़ने वाले शुल्क से कंपनियों की लागत और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। भारत का कुल दवा निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 2.13 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 31.12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि इसी अवधि में अमेरिका को होने वाला Pharmaceutical निर्यात करीब 10 फीसदी घटकर 9.47 अरब डॉलर रह गया।
भारत का सबसे बड़ा फार्मा निर्यात बाजार है अमेरिका
Directorate General of Commercial Intelligence and Statistics के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा फार्मा निर्यात बाजार बना हुआ है। भारत के कुल दवा निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 30 फीसदी से अधिक है।
उत्तरी अमेरिका क्षेत्र में भी आई गिरावट
अमेरिका के अलावा Canada और Mexico को शामिल करने वाले पूरे उत्तरी अमेरिकी बाजार में भी भारत के फार्मा निर्यात में गिरावट दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2025-26 में इस क्षेत्र को होने वाला निर्यात करीब 7.9 फीसदी कम हुआ।
सभी देशों पर पड़ेगा असर
कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में इस्तेमाल होने वाली करीब 90 प्रतिशत Generic Prescription दवाएं आयात की जाती हैं। ऐसे में जब भी यह टैरिफ लागू होगा, इसका असर अमेरिका को दवाएं निर्यात करने वाले सभी देशों पर होगा, यह केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका में Generic दवाओं के निर्माण संयंत्र स्थापित करने की आर्थिक व्यवहार्यता पर सवाल उठते हैं। इसलिए अमेरिकी बाजार में दवाओं की आपूर्ति करने वाली भारतीय फार्मा कंपनियों पर इसका प्रभाव बेहद सीमित रहने की संभावना है।
बड़े बदलाव की उम्मीद करना मुश्किल
विशेषज्ञों का मानना है कि Generic दवा निर्माण के लिए सिर्फ फैक्ट्री लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कच्चे माल की उपलब्धता, Supply Chain, लागत और कुशल संसाधनों की भी जरूरत होती है। यही कारण है कि इतने कम समय में बड़े बदलाव की उम्मीद करना मुश्किल है।

