Sunday, June 28, 2026 |
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Title: देश में असंगठित रोजगार की हिस्सेदारी अब भी सबसे अधिक, सामाजिक सुरक्षा विस्तार की जरूरत बढ़ी: SBI रिपोर्ट

by Business Remedies
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SBI Report Highlighting Rising Need For Workforce Formalisation And Social Security Coverage In India

देश में असंगठित रोजगार की स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है और सामाजिक सुरक्षा दायरे को बढ़ाने की आवश्यकता तेजी से महसूस की जा रही है। भारतीय स्टेट बैंक की एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अलग-अलग राज्यों में आर्थिक गतिविधियों और उद्योगों की स्थिति भिन्न होने के बावजूद अधिकतर कामगार अब भी असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं के असंगठित रोजगार में शामिल होने की संभावना पुरुषों की तुलना में 4.8 प्रतिशत अधिक है। वहीं निर्माण क्षेत्र में कार्य करने वाले श्रमिक कृषि क्षेत्र के श्रमिकों की तुलना में 4.5 प्रतिशत अधिक असंगठित रोजगार में जुड़े हुए हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सरकारी प्रशिक्षण और सहायता योजनाएं महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जिन महिलाओं को सरकारी सहायता या वित्तीय सहयोग मिला, उनमें स्वरोजगार की संभावना5.8प्रतिशत तक बढ़ी है। इससे यह संकेत मिलता है कि यदि सरकार प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग कार्यक्रमों का विस्तार करती है तो महिलाओं की आर्थिक भागीदारी में और अधिक सुधार हो सकता है। राज्यों की स्थिति पर नजर डालें तो पंजाब में सबसे अधिक 82 प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्र में कार्यरत पाए गए हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश और बिहार में 81 प्रतिशत श्रमिक असंगठित रोजगार से जुड़े हुए हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी लगभग 74 प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार इन राज्यों में कृषि, दिहाड़ी मजदूरी और कम उत्पादकता वाले रोजगार अधिक होने के कारण असंगठित रोजगार का स्तर ऊंचा बना हुआ है।

इसके विपरीत हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में उद्योग और सेवा क्षेत्र का विस्तार अपेक्षाकृत बेहतर होने के कारण असंगठित रोजगार का स्तर कम देखा गया है। इन राज्यों में संगठित उद्योगों, विनिर्माण इकाइयों और सेवा गतिविधियों में वृद्धि से रोजगार अधिक औपचारिक हो रहा है। रिपोर्ट के अनुसार असंगठित श्रमिकों का सबसे बड़ा हिस्सा अब भी ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद है। कुल असंगठित श्रमिकों में लगभग59प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं जबकि 41 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में कार्यरत हैं। क्षेत्रवार आंकड़ों में कृषि सबसे बड़ा रोजगार स्रोत बना हुआ है और कुल असंगठित कार्यबल का 42 प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। इसके बाद व्यापार और होटल क्षेत्र 17 प्रतिशत तथा अन्य सेवा गतिविधियां14प्रतिशत हिस्सेदारी रखती हैं।

भारत के श्रम बाजार में पिछले 37 वर्षों में संरचनात्मक बदलाव भी देखने को मिला है। वर्ष1987-88में देश के कुल कार्यबल का66प्रतिशत हिस्सा कृषि क्षेत्र में था जो वर्ष 2023-24 तक घटकर 43 प्रतिशत रह गया है। इसका अर्थ है कि बड़ी संख्या में लोग अब अन्य क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं, हालांकि उनमें से काफी लोग अब भी असंगठित रोजगार में ही कार्य कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 20 से अधिक श्रमिकों वाले बड़े उद्यमों में रोजगार बढ़ा है। वर्तमान में 13.7 प्रतिशत श्रमिक बड़े उद्यमों में कार्यरत हैं जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 10.8 प्रतिशत था। सरकार द्वारा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और औद्योगिक विस्तार पर जोर दिए जाने से संगठित रोजगार के अवसरों में वृद्धि देखने को मिल रही है।



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