पिछले दो-तीन महीनों से अमेरिका की ओर से भारत पर काफी टैरिफ लगा देने से रिश्तों में थोड़ी कड़वाहड़ आ गई थी, लेकिन संभवतय: आने वाले कुछ दिनों में समझौते पर सहमति बनने से रिश्तों में आई तल्खी पर जल्द विराम लग सकता है। अगस्त में अमेरिका ने भारत को तगड़ा झटका देते हुए कई भारतीय वस्तुओं के आयात पर 50 फीसदी का भारी शुल्क लगा दिया था। इसमें रूसी तेल खरीदने के लिए जुर्माने के तौर पर 25 फीसदी अतिरिक्त शुल्क भी शामिल है। भारत शुल्क में कटौती के लिए अमेरिका के साथ सौदेबाजी कर रहा है। इसमें ना केवल 25 फीसदी दंडात्मक शुल्क को हटाना बल्कि जवाबी शुल्क को भी घटाकर 15 फीसदी के दायरे में लाना शामिल है। भारत शुल्क को अपने एशियाई प्रतिस्पर्धियों से कम करने पर जोर दे रहा है। पर गत दिनों से भारत और अमेरिका प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं। दोनों पक्ष अधिकांश मुद्दों पर सहमति बना चुके हैं और अब केवल समझौते की भाषा को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अमेरिका और भारत के बीच इस समझौते के पहले चरण के लिए अब तक पांच दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है। दोनों देशों का लक्ष्य जल्द से जल्द इस समझौते को लागू करना है, जिससे व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ सकें। फिलहाल दोनों देश एक व्यापक समाधान पर बातचीत कर रहे हैं ताकि द्विपक्षीय व्यापार समझौते में लंबित मुद्दों को निपटाया जा सके। साथ ही भारत द्वारा रूसी तेल की लगातार खरीद पर अमेरिका की चिंताओं को भी दूर किया जा सके। दोनों पक्षों की टीमें वर्चुअल माध्यम से बातचीत कर रही हैं। अगले दौर की आमने-सामने की वार्ता की तारीख अभी तय होना बाकी है।

