नई दिल्ली,
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने नासिक मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए जांच के दायरे में आए कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। कंपनी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है और उत्पीड़न के मामलों में उसकी नीति पूरी तरह शून्य सहनशीलता की है।
कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि जैसे ही उसे इस मामले की जानकारी मिली, तुरंत कदम उठाए गए। जिन कर्मचारियों पर आरोप लगे हैं और जिनकी जांच चल रही है, उन्हें निलंबित कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी। देश की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी सेवा निर्यातक कंपनी टीसीएस इस समय गंभीर आरोपों के चलते जांच के घेरे में है। नासिक स्थित इकाई में यौन उत्पीड़न और धार्मिक परिवर्तन से जुड़े आरोपों को लेकर कई प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में अब तक कुल नौ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी हैं।
यह विवाद मार्च में शुरू हुआ जब एक महिला ने अपने सहकर्मी पर विवाह का झूठा वादा करके शारीरिक संबंध बनाने का आरोप लगाया। पुलिस जांच के दौरान अन्य शिकायतें भी सामने आईं, जिसके बाद इसी प्रकार के आरोपों से जुड़ी आठ और प्राथमिकी दर्ज की गईं। जांच के दौरान अब तक कम से कम छह कर्मचारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। यह गिरफ्तारियां नासिक पुलिस आयुक्त कार्यालय को मिले खुफिया संकेतों के आधार पर की गई हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने नासिक पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना भी की है।
मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है। इसके अलावा, पुणे स्थित मानव संसाधन विभाग के एक अधिकारी से भी पूछताछ की जा रही है। जांच अभी जारी है और विशेष जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कंपनी ने दोहराया है कि किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या दबाव के मामलों में वह सख्त रुख अपनाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे।

