बिजनेस रेमेडीज/नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने निवेशकों को ऐसी छोटी एवं मझोली कंपनियों (एसएमी) के शेयरों में अपना पैसा लगाने के खिलाफ आगाह किया, जो अपने परिचालन की झूठी तस्वीर पेश करके शेयर मूल्य में हेरफेर करती हैं। सेबी ने बयान में कहा कि यह बात संज्ञान में आई है कि सूचीबद्धता के बाद कुछ एसएमई कंपनियां या उनके प्रवर्तक ऐसी सार्वजनिक घोषणाएं कर रहे हैं, जिनसे उनके परिचालन की सकारात्मक छवि बनती है। ऐसी घोषणाओं के बाद बोनस निर्गम, शेयर विभाजन और तरजीही आवंटन जैसी विभिन्न कॉरपोरेट कार्रवाइयां की जाती हैं। इन कदमों से निवेशकों में सकारात्मक धारणा बनती है और वे ऐसी प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए प्रेरित होते हैं। साथ ही, इससे प्रवर्तकों को ऐसी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी ऊंचे दामों पर बेचने का आसान अवसर भी मिलता है। सेबी ने बयान में कहा, “निवेशकों से आग्रह किया जाता है कि वे उपरोक्त तरीकों के प्रति सावधान और सतर्क रहें तथा ऐसी प्रतिभूतियों में निवेश करते समय सावधानी बरतें। इसके अलावा, निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे असत्यापित सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करें और सुझावों/अफवाहों के आधार पर निवेश न करें।” हाल ही में सेबी ने ऐसी इकाइयों के खिलाफ आदेश पारित किए हैं।
यह देखा जा सकता है कि इन इकाइयों की कार्यप्रणाली मोटे तौर पर ऊपर बताए गए तरीकों जैसी ही है। उभरती कंपनियों के लिए धन जुटाने के वैकल्पिक स्रोत के रूप में काम करने के लिए शेयर बाजारों के एसएमई मंच को 2012 में शुरू किया गया था। तब से, एसएमई निर्गम की संख्या में वृद्धि हुई है और साथ ही ऐसे प्रस्तावों में निवेशकों की भागीदारी भी बढ़ी है। पिछले दशक के दौरान इस मंच के माध्यम से 14,000 करोड़ रुपये से अधिक जुटाए गए हैं, जिनमें से लगभग 6,000 करोड़ रुपये सिर्फ पिछले वित्त वर्ष (2023-24) के दौरान जुटाए गए।




