Monday, July 27, 2026 |
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6-9 महीनों में बॉन्ड टोकनाइजेशन पायलट शुरू कर सकता है सेबी, ऋण बाजार सुधारों पर तेज़ी से काम जारी

by Business Remedies
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SEBI Chairman Tuhin Kanta Pandey discussing Bond Tokenisation Pilot and Corporate Bond Market Reforms in India

भारत के पूंजी बाजार नियामक सेबी अगले 6-9 महीनों के भीतर बॉन्ड टोकनाइजेशन पायलट शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही संस्था कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ाने, शेयर दलालों के पूंजी मानकों की समीक्षा, आईपीओ मूल्य निर्धारण प्रक्रिया में सुधार और विदेशी निवेशकों की पहुंच को आसान बनाने जैसे कई महत्वपूर्ण सुधारों पर भी काम कर रही है।

सेबी के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने मुंबई में आयोजित आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज इंडिया निवेशक सम्मेलन में कहा कि बॉन्ड टोकनाइजेशन पायलट को अगले 6-9 महीनों के भीतर लागू किए जाने की उम्मीद है। यह पहल भारत के ऋण बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने और निश्चित आय वाले निवेश साधनों को अधिक सुलभ तथा प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को लेकर पांडे ने बताया कि सेबी द्वितीयक कारोबार में तरलता बढ़ाने के लिए बाजार निर्माण ढांचे पर काम कर रहा है। इससे निवेशकों को बॉन्ड की खरीद-बिक्री अधिक आसानी से करने में मदद मिलेगी और बाजार की गहराई बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि आगामी सुधारों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के साथ समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। केंद्रीय बैंक इस वर्ष की शुरुआत में कुल प्रतिफल स्वैप और कॉरपोरेट बॉन्ड डेरिवेटिव्स से संबंधित प्रारूप दिशा-निर्देश जारी कर चुका है। नियामकीय ढांचा अंतिम रूप लेने के बाद इन उत्पादों को आगे बढ़ाया जाएगा। हाल के वर्षों में कॉरपोरेट बॉन्ड निर्गम में तेज़ वृद्धि देखने को मिली है। कॉरपोरेट बॉन्ड निर्गम का आकार ₹.9 लाख करोड़ से अधिक हो चुका है। वहीं, कुल बाजार पूंजीकरण देश के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 128 प्रतिशत पहुंच गया है। इसके अलावा म्यूचुअल फंड उद्योग की प्रबंधित परिसंपत्तियां ₹.80 लाख करोड़ के स्तर को पार कर चुकी हैं।

इसके बावजूद सेबी का मानना है कि द्वितीयक बॉन्ड बाजार में तरलता अभी भी प्रणाली के कुल आकार की तुलना में अपेक्षाकृत सीमित है। इस चुनौती से निपटने के लिए संस्था लगातार नए उपायों पर काम कर रही है। पांडे ने कहा कि सेबी द्वारा बाजार स्तर के विस्तृत आंकड़ों और अधिक वित्तीय साधनों को शामिल करते हुए अपनाई गई संशोधित पद्धति बाजार की वास्तविक मजबूती का अधिक सटीक चित्र प्रस्तुत करती है।

उन्होंने कहा कि इन सभी विकासों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि पूंजी बाजार अब घरेलू बचत और संपत्ति सृजन का एक प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और वित्तीय बाजारों की भूमिका अर्थव्यवस्था में लगातार मजबूत हुई है। एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार के तहत सेबी शेयर दलालों के लिए परिवर्तनीय निवल संपत्ति आवश्यकताओं की समीक्षा भी कर रहा है। पांडे ने स्पष्ट किया कि इस प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श जारी है और कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। संभावना है कि नए ढांचे में पूंजी पर्याप्तता और परिचालनिक लचीलेपन के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।



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