नई दिल्ली | एजेंसी | खान मंत्रालय के सचिव Piyush Goyal ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए वैधानिक मंजूरियों में तेजी लाने, खनन कार्यों की शीघ्र शुरुआत सुनिश्चित करने और नीलाम किए गए ब्लॉकों से समय पर उत्पादन शुरू करने का आग्रह किया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, Piyush Goyal ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और श्रेणी-ए खनिज संपन्न राज्यों के साथ मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में देशभर में खनिज ब्लॉकों की नीलामी और उनके संचालन की प्रगति की समीक्षा की गई।
बैठक में खनन क्षेत्र में सुधारों को गति देने, घरेलू खनिज उत्पादन बढ़ाने और नीलाम किए गए खनिज ब्लॉकों के समय पर संचालन पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 212 खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई, जो नीलामी प्रक्रिया शुरू होने के बाद किसी भी वित्त वर्ष में सबसे अधिक है। इनमें 22 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की नीलामी भी शामिल थी, जो भारत की आर्थिक वृद्धि और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने पर सरकार के निरंतर फोकस को दर्शाता है।
खान मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि वर्ष 2015 में नीलामी व्यवस्था शुरू होने के बाद से वित्त वर्ष 2020-21 तक कुल 108 खनिज ब्लॉकों की नीलामी की गई थी। इसके बाद नीलामी की गति में उल्लेखनीय तेजी आई और वित्त वर्ष 2022 से वित्त वर्ष 2025 के बीच 364 खनिज ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की गई, जो औसतन लगभग 90 ब्लॉक प्रति वर्ष है। बैठक में नीलाम किए गए ब्लॉकों की संचालन स्थिति की भी समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि वित्त वर्ष 2026 में कुल 36 खनिज ब्लॉक संचालन में लाए गए हैं, जिनमें 28 ग्रीनफील्ड और 8 ब्राउनफील्ड ब्लॉक शामिल हैं। वहीं, वित्त वर्ष 2016 से वित्त वर्ष 2025 तक की पूरी अवधि में कुल 58 ब्लॉक संचालन में लाए गए थे, जिनमें 20 ग्रीनफील्ड और 38 ब्राउनफील्ड ब्लॉक शामिल थे।
सचिव ने आत्मनिर्भर भारत के विजन को हासिल करने और भारत की खनिज सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण खनिजों के विकास के महत्व पर भी जोर दिया। हालिया सर्वेक्षणों में राजस्थान के Siwana Ring Complex के कई ब्लॉकों में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स (HREE) और महत्वपूर्ण दुर्लभ धातुओं के बड़े भंडार की पहचान की गई है। केंद्रीय खान मंत्रालय पहले ही तीन ब्लॉकों के तकनीकी मूल्यांकन का कार्य विशेष एजेंसियों को सौंप चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि खोज कार्य प्रारंभिक आकलन से आगे बढ़ चुका है।

