नई दिल्ली,
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने Sovereign Gold Bond (एसजीबी) 2020-21 Series VII के निवेशकों के लिए समय से पहले निकासी (premature redemption) की खिड़की खोल दी है। सोमवार को इस योजना से बाहर निकलने की अंतिम तिथि तय की गई है। इस अवसर पर निवेशकों को उनके मूल निवेश पर 200 प्रतिशत से अधिक का लाभ मिल रहा है, जिससे यह योजना एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
निकासी मूल्य और निवेशकों को बड़ा लाभ
आरबीआई द्वारा तय किया गया निकासी मूल्य प्रति इकाई 15,254 रुपये रखा गया है। यह मूल्य 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन कार्यदिवसों के बंद भाव के औसत के आधार पर तय किया गया है, जिसकी जानकारी इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन द्वारा दी गई है। जिन निवेशकों ने इस योजना में शुरुआत में 5,051 रुपये प्रति इकाई के मूल्य पर निवेश किया था, उन्हें अब 200 प्रतिशत से अधिक का पूंजीगत लाभ मिल रहा है। वहीं, जिन लोगों ने ऑनलाइन आवेदन कर प्रति ग्राम 50 रुपये की छूट का लाभ लिया था, उनके लिए यह रिटर्न लगभग 205 प्रतिशत तक पहुंच गया है, हालांकि इसमें ब्याज शामिल नहीं है। इस योजना के तहत निवेशकों को सालाना 2.5 प्रतिशत की दर से ब्याज भी मिलता है, जो हर छह महीने में उनके खाते में जमा किया जाता है। इस प्रकार निवेशकों को पूंजीगत लाभ के साथ-साथ नियमित आय का भी फायदा मिलता रहा है।
पांच साल बाद निकासी की अनुमति
यह बॉन्ड 20 अक्टूबर 2020 को जारी किया गया था और पांच वर्ष पूरे होने के बाद आरबीआई के नियमों के अनुसार इसमें समय से पहले निकासी की अनुमति मिलती है। हालांकि, इन बॉन्ड की कुल अवधि आठ वर्ष होती है, लेकिन निवेशकों के लिए अंत तक बने रहना अनिवार्य नहीं है। निवेशकों को निकासी के लिए उसी बैंक शाखा, डाकघर या स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन कार्यालय में आवेदन देना होगा, जहां से उन्होंने यह बॉन्ड खरीदा था। निकासी की राशि सीधे निवेशक के पंजीकृत बैंक खाते में जमा कर दी जाएगी। आरबीआई ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे अपने बैंक खाते, मोबाइल नंबर और ईमेल जैसी जानकारी समय रहते अपडेट कर लें, ताकि भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो।
कर नियमों में बदलाव का असर
Budget 2026 के बाद लागू नियमों के अनुसार, केवल वे निवेशक जो मूल खरीदार हैं और परिपक्वता अवधि पूरी होने तक निवेश बनाए रखते हैं, उन्हें पूंजीगत लाभ पर कर छूट मिलेगी। यदि निवेशक समय से पहले निकासी करते हैं और निवेश अवधि 12 महीने से अधिक है, तो उन पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर लगेगा। वहीं, कम अवधि के निवेश पर सामान्य आयकर स्लैब के अनुसार कर देना होगा। दूसरी ओर, जिन निवेशकों ने यह बॉन्ड द्वितीयक बाजार से खरीदा है, उन्हें किसी भी स्थिति में पूंजीगत लाभ पर कर छूट नहीं मिलेगी। साथ ही, ब्याज से होने वाली आय पर भी हर स्थिति में लागू कर देना होगा। ध्यान देने वाली बात यह है कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने अभी तक किसी नए Sovereign Gold Bond जारी करने की घोषणा नहीं की है। April 2026 तक कोई नया कैलेंडर जारी नहीं होने से इस योजना के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

