भारत अब केवल तकनीकी कंपनियों के लिए बड़ा उपभोक्ता बाजार नहीं रह गया है, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डिजिटल बदलाव का वैश्विक उदाहरण बनकर उभर रहा है। क्वालकॉम के मुख्य परिचालन अधिकारी आकाश पालखीवाला ने कहा कि दुनिया जिन तकनीकों को लागू करने की कोशिश कर रही है, उनका वास्तविक उपयोग भारत में पहले से दिखाई देने लगा है। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आकाश पालखीवाला ने कहा कि भारत में बड़े स्तर पर डिजिटलीकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीकों को तेजी से अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया जिस बदलाव को भविष्य मान रही है, भारत उसमें पहले ही आगे बढ़ चुका है।
उन्होंने बताया कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता इंसानों और उपकरणों के बीच संवाद का सबसे बड़ा माध्यम बनने वाली है। उपयोगकर्ताओं को अलग-अलग अनुप्रयोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, बल्कि बुद्धिमान कृत्रिम एजेंट स्वयं कार्य करने में सक्षम होंगे। ये तकनीक उपयोगकर्ता की जरूरत, आसपास का वातावरण और बातचीत को समझकर व्यक्तिगत तरीके से जवाब देगी। आकाश पालखीवाला ने उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य में लोग कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सीधे कह सकेंगे कि हमारे लिए विमान टिकट बुक करो, होटल कमरा आरक्षित करो और अन्य जरूरी कार्य पूरे करो। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की तकनीक उपयोगकर्ताओं के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह बदलाव केवल स्मार्टफोन तक सीमित नहीं रहेगा। वाहन, पहनने योग्य उपकरण और आपस में जुड़े आधुनिक मशीनों में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका तेजी से बढ़ेगी। क्वालकॉम खुद को कनेक्टेड कम्प्यूटिंग क्षेत्र में अग्रणी कंपनी के रूप में देखती है, जहां कनेक्टिविटी, कम ऊर्जा में उच्च प्रदर्शन और Edge AI पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आकाश पालखीवाला ने कहा कि कंपनी ने अपनी पहचान स्मार्टफोन क्षेत्र से बनाई थी, लेकिन अब वह मोबाइल कारोबार से कहीं आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने रोबोटिक्स के भविष्य पर भी चर्चा करते हुए कहा कि क्वालकॉम अपनी ऑटोमोबाइल तकनीकों का उपयोग अगली पीढ़ी के रोबोट विकसित करने में करेगी।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हर व्यक्ति के साथ एक रोबोट मौजूद हो सकता है, जो उसके दैनिक कार्यों में मदद करेगा और उसमें स्नैपड्रैगन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। भारत के तकनीकी माहौल की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अब कंपनी भारत को केवल बिक्री बाजार के रूप में नहीं देखती। पिछले10से15वर्षों में भारत में हुए डिजिटलीकरण और तकनीकी बदलाव ने वैश्विक कंपनियों की सोच पूरी तरह बदल दी है। अब भारत को ध्यान में रखकर उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं और भारत में तैयार तकनीकों को वैश्विक बाजारों में भी भेजा जा रहा है।

