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प्री-बजट मेमोरेंडम (पीबीएम) 2025 के लिए सीआईआई ने राज्य सरकार को सिफारिशें सौंपी

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज़/जयपुर। सीआईआई राजस्थान के वाईस चेयरमैन और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के संस्थापक एमडी और सीईओ, संजय अग्रवाल ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री, मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव को राइजिंग राजस्थान की सफलता के लिए बधाई प्रेषित करते हुए कहा कि एमओयू के क्रियान्वयन के लिए राजस्थान सरकार द्वारा जो स्टेप्स लिए जा रहे हैं उनकी दिल से प्रशंसा और धन्यवाद करता हूं। प्री बजट मेमोरेंडम (पीबीएम) 2025 के लिए सीआईआई ने राज्य सरकार को सिफारिशें की।
1. राज्य सरकार ने नई राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (रिप्स) 2024 एवं 9 नई पॉलिसीज निकाली है। यह एक अभूतपूर्व निर्णय है, मगर पॉलिसीज का इम्प्लीमेंटेषन सबसे महत्वपूर्ण कार्य है। लोगों में इसकी अवेयरनेस की कमी है। हालांकि सीआईआई अपने स्तर पर इसे उद्योगों को सुचित करता रहता है मगर हमारा मानना है कि सरकार के प्रतिनिधि सीआईआई के साथ राज्य के विभिन्न शहरों में इसकी पब्लिसिटी करें, जिसके इसके अच्छे परिणाम मिलेंगे, ऐसा पहले भी होता रहा है।
2. रिप्स 2024 में क्लाज 6.3 में एमएसएमईज् के एक्सपॉनशन पर कोई इन्सेन्टिव नहीं है। पहले रिप्स 2022 में एमएसएमईज् को एक्सपॉनशन पर इन्सेन्टिव मिलता था। एमएसएमईज् हर स्टेट के रेवेन्यु एण्ड एम्पलॉयमेंट में सबसे बड़ा योगदान देती है।
3. इसी तरह क्लाज 6.2 में रिप्स 2022 को राहत दी गई है पर ऐसे कई उद्योग हैं जिनका प्रोडक्शन कोविड के कारण लंबित हुआ था। इसलिए इस पर हमारा आग्रह है कि इस क्लाज में रिप्स पॉलिसी 2019 को भी शामिल किया जाए।
4. वैसे तो राज्य सरकार एमओयू के क्रियान्वयन के लिए उचित उपाय कर रही है पर हमारा मानना है कि इंडस्ट्री को इसमें साथ लेंगे तो जो लोग रेस्पोण्ड नहीं कर रहे हैं सीआईआई इसमें उन मेंबर्स को मोटिवेट करके एमओयू के इंप्लीमेंटेशन में मदद कर सकता है। ऐसे बहुत सी इंडस्ट्री मेंबर्स होते हैं जिन्हें इसमें मदद की जरूरत होती है।
5. प्रधानमंत्री के नेट जीरो बाई 2070 को अचीव करने के लिए एन्वायरमेन्टल, सोशियल और गवर्ननेंस (ईएसजी), और ग्रीन बिल्डिंग मूवमेन्ट को प्रमोट करने की जरूरत है। लोगों में इसके अवेयरनेस की कमी है। हमारा मानना है कि सरकार ग्रीन बिल्डिंगस, ईएसजी को प्रमोट करने एवं नेट जीरो बाई 2070 को अचीव करने के लिए उन्हें स्टांप ड्यूटी में 1 प्रतिशत की छूट दें जो ग्रीन बिल्डिंग्स बनाते और खरीदते है।
6. रिन्यूएबल एनर्जी को सरकार प्रमोट कर तो रही है, परंतु राज्य के लोगों को इसका लाभ कम ही मिल रहा है। अगर राजस्थान सरकार पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर Wheeling Charges एवं additional surcharge or Cress Subsidy charges कीsevings करें तो बाहर से इन्वेस्टमेंट के चांसेस और ज्यादा हो जाएंगे।
7. राज्य सरकार को CII के मॉडल करियर सेंटर की तर्ज पर कम से कम हर डिविजनल हैडक्वाटर्स पर एक MCC सेंटर खोलना चाहिए। हमें उम्मीद है कि इस तरह से एक साल में कम से कम 50 हजार लोगों को अतिरिक्त अपॉइंटमेंट मिलेगा। यदि स्किल को इंडस्ट्री के साथ क्लासमेट बनाया जाए तो गारमेंट्स, माइनिंग, टेक्सटाइल, हैंडीक्राफ्ट में एक लाख लोगों को और रोजगार मिलेगा। नए कोर्सेज जैसे ए आई, स्मार्ट एग्रीकल्चर और ड्रोन टेक्नोलॉजी, सोलर टेक्निकल, साइबर सिक्योरिटी के शॉर्ट टर्म क्लासेस की जरूरत है।
8. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात सरकारें पेटेंट और कॉपीराइट्स पर काफी काम कर रही है। वहीं CII के साथ मिलकर पीपीपी मॉडल पर सेंटर बनाए गए हैं जो स्टार्टअप और इंडस्ट्री को पेटेंट दिलाते में मदद करते हैं और साथ में अवेयरनेस सेशन भी करते है। राज्य में इस अवसर की कमी है और नए स्टार्टअप एवं इंडस्ट्री को इसके बारे में बताने तथा इसका लाभ लेने की जरूरत है। राज्य सरकार को राजस्थान टेक्नोलॉजिकल डेवलपमेंट सेंटर बनाने की जरूरत है।
9. राज्य सरकार ने 13 MSME फैसिलिटी सेंटर का गठन किया है जिससे MSME का रुका हुआ अमाउंट मिल सके जो की विभिन्न सरकारी विभागों एवं बड़े उद्योगों में 45 दिन से ज्यादा रुका हुआ है।
हमारा आग्रह है कि
1. काउंसिल की मीटिंग रैगुलर हो। केवल जयपुर में ही 2000 से ज्यादा केसेस पेंडिंग हैं।
2. इन केसेस को कंप्लीट करने का समय निर्धारित हो इसमें 6 महीने से अधिक समय नहीं लगना चाहिए।
3. सरकारी विभागों को स्पेशली जेवीवीएनएल, एवीवीएनएल, जेडीवीवीएनएल, आरएमसीएल etc. को आदेश दिया जाए कि वे MSME का पेमेंट 45 दिन से अधिक नहीं रोकें।
सीआईआई राजस्थान के वरिष्ठ निदेशक एवं प्रमुख नितिन गुप्ता भी आज इसमें शामिल हुए।



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