नई दिल्ली,
भारत की मजबूत वित्तीय व्यवस्था का वैश्विक स्तर पर स्पष्ट संदेश देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में अपना लगातार नौवां Budget भाषण पेश करते हुए कहा कि सुधारों को गति देने के लिए सरकार Banking क्षेत्र पर High-Level Committee गठित करेगी। यह समिति पूरे बैंकिंग तंत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और देश की अगली आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए आवश्यक सुझाव देगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह समूह वित्तीय स्थिरता, समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण पर विशेष ध्यान देगा, ताकि Viksit Bharat के लक्ष्य की दिशा में बैंकिंग व्यवस्था को और अधिक सक्षम बनाया जा सके। उन्होंने बताया कि भारतीय बैंक इस समय मजबूत स्थिति में हैं। उनकी बैलेंस शीट स्वस्थ है, मुनाफा ऊंचा है और खराब ऋण पर बेहतर नियंत्रण स्थापित किया गया है। परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है और प्रावधान कवरेज 98 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जिससे यह क्षेत्र स्थिर और विकास के अगले चरण के लिए तैयार माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFC की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए सरकार उन्हें पुनर्गठित कर बड़े और सशक्त संस्थानों में बदलेगी, जैसे पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण कॉरपोरेशन। इससे वित्तीय संसाधनों का बेहतर उपयोग और जोखिम प्रबंधन संभव हो सकेगा।
विदेशी निवेशकों के लिए विदेशी मुद्रा कानूनों के अंतर्गत गैर-ऋण निवेश के नियमों की समीक्षा की जाएगी। इसका उद्देश्य इन नियमों को अधिक आधुनिक और उपयोगकर्ता अनुकूल बनाना है, ताकि बदलती आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप निवेश को प्रोत्साहन मिल सके। सरकार कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को भी सुदृढ़ करने की योजना बना रही है। इसके लिए मार्केट मेकिंग ढांचा तैयार किया जाएगा, जिसमें कोष तक पहुंच और कॉरपोरेट बॉन्ड सूचकांकों पर डेरिवेटिव की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही कॉरपोरेट बॉन्ड पर टोटल रिटर्न स्वैप की भी शुरुआत की जाएगी, जिससे निवेशकों को जोखिम प्रबंधन के नए विकल्प मिलेंगे।
नगरपालिका बॉन्ड बाजार को बढ़ावा देने के लिए सरकार बड़े शहरों को प्रोत्साहन देगी। यदि कोई शहर 1,000 करोड़ से अधिक मूल्य का एकल बॉन्ड जारी करता है तो उसे Rs.100करोड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह पहल पहले से चल रही अमृत योजना को आगे बढ़ाते हुए की जाएगी। वित्त मंत्री ने बताया कि Budget तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान युवाओं सहित देशभर के नागरिकों से विभिन्न मंचों के माध्यम से सुझाव लिए गए हैं, ताकि नीतियों को अधिक सहभागी और व्यावहारिक बनाया जा सके।

