New Delhi,
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेज उछाल के बावजूद देश में फिलहाल पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, लेकिन सरकार अभी उपभोक्ताओं को राहत देने के पक्ष में दिखाई दे रही है।सरकारी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को ही इस बढ़ी हुई लागत का असर अपने स्तर पर वहन करना पड़ सकता है। इसका अर्थ यह है कि कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन आम उपभोक्ताओं को तुरंत पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में वृद्धि का सामना नहीं करना पड़ेगा।
दरअसल, वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेज़ उछाल देखा गया है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट नामक प्रमुख कच्चे तेल का मानक लगभग 27 प्रतिशत बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। इसी तरह ब्रेंट कच्चा तेल भी लगभग 28 प्रतिशत की बढ़त के साथ 116 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। वर्ष 2022 के बाद यह पहली बार है जब दोनों प्रमुख वैश्विक मानक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचे हैं। इस तेजी के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य के आसपास आपूर्ति में आई बाधाएं मानी जा रही हैं। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतों में इतनी तेज़ बढ़त के बावजूद देश भर में पेट्रोल और डीज़ल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सामान्य तौर पर भारत में ईंधन की खुदरा कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के अनुरूप समय-समय पर समायोजित की जाती हैं। लेकिन जब बाज़ार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव होता है, तब सरकार कभी-कभी तेल कंपनियों से कीमतों में तत्काल बदलाव न करने का आग्रह करती है। सरकारी सूत्रों ने पहले भी स्पष्ट किया था कि फिलहाल पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें नहीं बढ़ाई जाएंगी। उनका कहना है कि देश में ऊर्जा भंडार की स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो रही है और आपूर्ति व्यवस्था अधिक स्थिर होती जा रही है। इससे सरकार को ईंधन आपूर्ति के प्रबंधन में अधिक भरोसा मिला है। ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में भी विविधता लाने के कदम उठाए हैं। पहले भारत के लगभग 60 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात होर्मुज़ जलडमरूमध्य से बाहर के स्रोतों से होता था, लेकिन अब यह हिस्सा बढ़कर लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। सूत्रों के अनुसार, हाल ही में होर्मुज़ जलडमरूमध्य से पहला तेल कार्गो भी आगे बढ़ना शुरू हो गया है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि आपूर्ति की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है।
दूसरी ओर, कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम एशिया में युद्ध कुछ दिनों तक भी जारी रहता है, तो खाड़ी क्षेत्र के निर्यातक देश आपूर्ति रोकने की स्थिति घोषित कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं और प्राकृतिक गैस की कीमतें भी कुछ ही हफ्तों में तेज़ी से बढ़ सकती हैं। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की कीमतों में आई इस बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि यह वृद्धि अस्थायी है और इसे ईरान के परमाणु खतरे का सामना करने की लागत के रूप में देखा जाना चाहिए।

