चारू भाटिया | जयपुर
फर्टिलिटी ट्रीटमेंट के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान काफी बदलाव आया है। असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी, फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप उपचार की योजनाओं ने प्रजनन चिकित्सा की संभावनाओं को बढ़ाया है। हालांकि, सफल फर्टिलिटी केयर केवल मेडिकल प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है। प्रत्येक दंपती की परिस्थितियों को समझना, उचित काउंसलिंग देना और उपचार से जुड़ी वास्तविक उम्मीदें निर्धारित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
जयपुर स्थित किंडल वॉम्ब IVF एंड फर्टिलिटी सेंटर के संस्थापक डॉ. गिर्राज प्रसाद स्वर्णकार ने अपने पेशेवर सफर में इन्हीं सिद्धांतों को प्राथमिकता दी है। सवाई माधोपुर में बचपन बिताने से लेकर स्त्री रोग में पोस्टग्रेजुएशन और IVF में विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने तक का उनका सफर भारत में प्रजनन चिकित्सा के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। इस बातचीत में वह अपने करियर, प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले कारकों, पुरुष बांझपन को लेकर बढ़ती जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व पर चर्चा करते हैं।
प्रश्न: आप किंडल वॉम्ब IVF एंड फर्टिलिटी सेंटर के संस्थापक हैं। अपनी पेशेवर यात्रा और चिकित्सा क्षेत्र में आने की प्रेरणा के बारे में बताइए।
उत्तर: मैं सवाई माधोपुर से हूं। मेरे बचपन का एक बड़ा हिस्सा यहीं बीता और मैंने अपनी स्कूली शिक्षा भी काफी हद तक यहीं पूरी की। मेरा परिवार व्यवसाय से जुड़ा रहा है, लेकिन मेरे मामा, जो डॉक्टर हैं, ने मुझे काफी प्रभावित किया। मैंने देखा कि परिवार और रिश्तेदारों के बीच उन्हें कितना सम्मान मिलता था। इसका मेरे मन पर गहरा प्रभाव पड़ा। उस समय चिकित्सा और इंजीनियरिंग को प्रतिष्ठित और सम्मानजनक पेशों के रूप में देखा जाता था।
मेरी मां भी मेरी प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत रही हैं। उनके प्रोत्साहन ने मुझे चिकित्सा की पढ़ाई करने और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का आत्मविश्वास दिया। मेरा मानना है कि मुझ पर उनका भरोसा मेरी सफलता की नींव में शामिल रहा है।
मैंने 2000 के शुरुआती वर्षों में मेडिकल की पढ़ाई शुरू की। विशेषज्ञता चुनने का समय आया तो स्त्री रोग मेरे लिए स्वाभाविक विकल्प बनकर उभरा। सवाई माधोपुर में पुरुष स्त्री रोग विशेषज्ञों का होना असामान्य नहीं था, हालांकि दूसरी जगहों पर मेरे इस फैसले पर सवाल उठाए गए। जब मैंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस अस्पताल से स्त्री रोग में पोस्टग्रेजुएशन किया, तो मुझसे शुरुआती सवालों में से एक यह था कि पुरुष होने के बावजूद मैं इस क्षेत्र में क्यों आना चाहता हूं।
मैं एक स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप में अपनी अलग पहचान बनाना चाहता था और मरीजों को व्यक्तिगत देखभाल देना चाहता था। शुरुआत में मेरी रुचि प्रजनन चिकित्सा में थी, हालांकि तब मैंने यह नहीं सोचा था कि आगे चलकर IVF में विशेषज्ञता हासिल करूंगा।
अजमेर, भीलवाड़ा और बांदीकुई सहित अलग–अलग जगहों पर काम करने के बाद मैंने फर्टिलिटी ट्रीटमेंट में व्यापक प्रशिक्षण लेने का फैसला किया। मुझे भोपाल में डॉ. प्रिया भावे के बारे में पता चला और मैंने उनकी फेलोशिप के लिए आवेदन किया। चयन परीक्षा में मेरे अच्छे प्रदर्शन के कारण मुझे बेहतर स्थान मिला। यह अवसर मेरे करियर का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
भोपाल में प्रशिक्षण के दौरान मैंने IVF के बारे में सीखने के साथ–साथ स्कैन, सोनोग्राफी और अन्य क्लिनिकल जिम्मेदारियों का अनुभव हासिल किया। वर्ष 2019 में मैं अपना क्लिनिक स्थापित करने के सपने के साथ सवाई माधोपुर लौटा। पारिवारिक परिस्थितियों के कारण अंततः मुझे जयपुर आना पड़ा, जहां मैंने किंडल वॉम्ब IVF एंड फर्टिलिटी सेंटर की स्थापना की।
प्रश्न: IVF की सफलता दर को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक कौन–से हैं?
उत्तर: उम्र एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ आमतौर पर अंडाणुओं की गुणवत्ता में गिरावट आती है। हालांकि, IVF के परिणाम कई बातों पर निर्भर करते हैं। इनमें दोनों पार्टनर की प्रजनन क्षमता, बांझपन का मूल कारण, अंडाणुओं और शुक्राणुओं की गुणवत्ता, भ्रूण का विकास तथा गर्भाशय की स्थिति शामिल हैं।
जीवनशैली भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। स्वस्थ वजन बनाए रखना, संतुलित आहार लेना, धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन सीमित करना प्रजनन स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकता है।
मरीजों को यह भी समझना चाहिए कि IVF एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें समय, नियमित निगरानी और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार दवाओं की आवश्यकता होती है। दवाओं की खुराक और उपचार की पद्धति हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। भ्रूण के विकास के लिए प्रयोगशाला का वातावरण भी महत्वपूर्ण है।
आधुनिक तकनीक ने उपचार की संभावनाओं को बेहतर बनाया है, लेकिन IVF हर मामले में गर्भावस्था की गारंटी नहीं देता।
प्रश्न: बार–बार भ्रूण का प्रत्यारोपण असफल होने से दंपती भावनात्मक और आर्थिक रूप से परेशान हो सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में आप उनकी काउंसलिंग कैसे करते हैं?
उत्तर: हम हर दंपती को तुरंत IVF कराने की सलाह नहीं देते। समस्या के कारण के आधार पर उपचार की शुरुआत दवाओं, जीवनशैली में बदलाव या कम जटिल उपचार पद्धतियों से की जा सकती है। IVF पर तभी विचार किया जाता है, जब चिकित्सकीय दृष्टि से इसकी जरूरत हो और अन्य उपयुक्त विकल्प सफल न हुए हों या उनके प्रभावी होने की संभावना कम हो।
जब किसी दंपती को बार–बार असफलता का सामना करना पड़ता है, तो हम अगला कदम तय करने से पहले उनकी मेडिकल हिस्ट्री और पिछले उपचार के परिणामों की समीक्षा करते हैं। इस दौरान काउंसलिंग बेहद जरूरी होती है, क्योंकि फर्टिलिटी ट्रीटमेंट भावनात्मक दबाव और आर्थिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है।
हम उपलब्ध विकल्पों, सफलता की वास्तविक संभावनाओं, उपचार की सीमाओं और अनुमानित खर्च के बारे में स्पष्ट जानकारी देते हैं। मरीजों को बिना उचित चिकित्सकीय आधार के महंगे उपचार को जारी रखने के लिए बाध्य महसूस नहीं करना चाहिए।
हमारी जिम्मेदारी ईमानदार जानकारी देना, भरोसा कायम करना और दंपती को सोच–समझकर निर्णय लेने में मदद करना है, न कि उनमें अवास्तविक उम्मीदें पैदा करना।
प्रश्न: देर से माता–पिता बनने की योजना बनाने का क्या अर्थ है और इसका प्रजनन क्षमता पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर: देर से माता–पिता बनने का अर्थ है अधिक उम्र में गर्भधारण की योजना बनाना। इसके पीछे करियर, आर्थिक परिस्थितियां और व्यक्तिगत प्राथमिकताएं जैसे कई कारण हो सकते हैं। हालांकि, इस दौरान उम्र के साथ प्रजनन क्षमता में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखना जरूरी है।
महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता दोनों में गिरावट आती है। साथ ही, गर्भपात और गर्भावस्था से जुड़ी कुछ जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। पुरुषों की प्रजनन क्षमता में भी उम्र के साथ बदलाव हो सकते हैं, हालांकि इसका स्वरूप महिलाओं से अलग होता है।
उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी स्थितियां भी गर्भावस्था की योजना को जटिल बना सकती हैं, विशेषकर जब उनका उचित प्रबंधन न किया जाए। जो दंपती अधिक उम्र में माता–पिता बनने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने प्रजनन स्वास्थ्य और उपलब्ध विकल्पों को समझने के लिए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
प्रश्न: आज फर्टिलिटी प्रिजर्वेशन के कौन–कौन से तरीके उपलब्ध हैं?
उत्तर: आज प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखने के कई विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें से किसी एक का चुनाव व्यक्ति की चिकित्सकीय स्थिति और भविष्य में परिवार बढ़ाने की योजना पर निर्भर करता है।
एग फ्रीजिंग के जरिए महिलाएं अपने निषेचित न हुए अंडाणुओं को भविष्य में इस्तेमाल के लिए सुरक्षित रख सकती हैं। स्पर्म फ्रीजिंग से पुरुष अपने शुक्राणुओं को उन चिकित्सकीय उपचारों या अन्य परिस्थितियों से पहले सुरक्षित रख सकते हैं, जिनसे प्रजनन क्षमता प्रभावित होने की आशंका हो।
एम्ब्रियो फ्रीजिंग में निषेचित अंडाणुओं यानी भ्रूणों को भविष्य में उपचार के लिए सुरक्षित रखा जाता है।
कुछ विशेष परिस्थितियों में ओवेरियन टिश्यू क्रायोप्रिजर्वेशन पर भी विचार किया जा सकता है। यह विशेष रूप से कैंसर के उपचार से गुजर रहे कुछ मरीजों के लिए उपयोगी हो सकता है।
प्रत्येक पद्धति की उपयुक्तता उम्र, बीमारी के निदान, उपचार की तात्कालिकता और व्यक्तिगत पसंद जैसे कारकों पर निर्भर करती है। किसी भी प्रक्रिया का चुनाव करने से पहले विशेषज्ञ से उसके लाभ, सीमाओं और वास्तविक संभावनाओं पर चर्चा करनी चाहिए।
प्रश्न: भ्रूण प्रत्यारोपण के बाद महिलाओं को किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए?
उत्तर: आमतौर पर मरीजों को सामान्य और हल्की दैनिक गतिविधियां जारी रखने की सलाह दी जाती है, जब तक कि उनका इलाज कर रहे विशेषज्ञ इसके विपरीत कोई निर्देश न दें। भ्रूण प्रत्यारोपण के बाद पूरी तरह बिस्तर पर आराम करना नियमित रूप से आवश्यक नहीं होता। हालांकि, डॉक्टर की सलाह के अनुसार अत्यधिक मेहनत वाले व्यायाम और ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए, जिनसे काफी शारीरिक परेशानी हो।
महिलाओं को निर्धारित दवाएं समय पर लेनी चाहिए, संतुलित आहार खाना चाहिए, पर्याप्त पानी पीना चाहिए और क्लिनिक के निर्देशों का पालन करना चाहिए। तनाव को नियंत्रित करना और जरूरत पड़ने पर भावनात्मक सहयोग लेना भी उपयोगी है।
चलने–फिरने या ऑफिस जाने जैसी सामान्य गतिविधियों से आमतौर पर परहेज करने की जरूरत नहीं होती, जब तक कि इसके पीछे कोई विशेष चिकित्सकीय कारण न हो।
प्रश्न: अंत में, प्रजनन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे दंपतियों के लिए आपका क्या संदेश है?
उत्तर: प्रजनन क्षमता के मामले में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए दंपतियों को चिकित्सकीय परामर्श लेने में अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए। यदि उन्हें कोई चिंता है या वे गर्भधारण की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही है, तो अनिश्चित समय तक इंतजार करने के बजाय समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
चिकित्सकीय सलाह लेने का अर्थ यह नहीं है कि हर दंपती को IVF या किसी अन्य उन्नत प्रक्रिया से गुजरना ही पड़ेगा। कुछ मामलों में सही जानकारी, काउंसलिंग, जीवनशैली में बदलाव या सरल उपचार ही पर्याप्त हो सकते हैं।
हर दंपती व्यक्तिगत ध्यान, ईमानदार मार्गदर्शन और वास्तविक उम्मीदों के साथ उपचार पाने का हकदार है। मेरा संदेश है कि सही समय पर सही सलाह लें, अपने विकल्पों को समझें और सोच–समझकर निर्णय करें।

