बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। कुंजेश कुमार पतसारिया | May 22,2025 |मन में अगर कुछ अलग करने की चाहत हो तो उसे बहुत कम समय में पूरा किया जा सकता है, ऐसा ही कर दिखाया है जॉन्स इलेक्ट्रिक कंपनी के प्रबंध निदेशक शशि भार्गव ने। सरकारी नौकरी से मोह भंग होने के कारण उन्होंने बाईस वर्ष की उम्र में ही पहले अलग-अलग कंपनियों में व्यवसाय के गुर सीखे और फिर उसे स्वयं की कंपनी स्थापित कर युवाओं के लिए रोजगार प्रेरक बने। आज जॉन्स इलेक्ट्रिक कंपनी प्राइवेट लिमिटेड ने मालवीया औद्योगिक क्षेत्र में अपनी पहचान कायम की है।

अपनी शैक्षिक पृष्ठभूमि के बारे में बताइए।
मेरी प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से हुई है। उसके बाद इंटरमीडिएट शिक्षा कोटा और वर्ष,1970 में इलाहाबाद, प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री ग्रहण की। इसके बाद भारत की इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियर्स (फेलो) और यूके के इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) की सदस्यता ग्रहण की।
आपने अपना व्यवसाय कब शुरू किया और आप किस तरह की सेवाएं प्रदान करते हैं?
सबसे पहले वर्ष,1971-72 में बिरला सीमेंट फैक्ट्री, सतना में सिस्टम और संचालन के विद्युत रखरखाव में प्रारंभिक उद्योग में अनुभव प्राप्त किया। वर्ष,1972 से 79 तक एशियाटिक्स, जयपुर में डीजल जनरेटर सेट के डिजाइन, निर्माण, स्थापना और कमीशनिंग में विशेषज्ञता वाले इस लघु उद्योग में काम किया। इसके अलावा सात वर्षों में बिजली प्रणालियों और परियोजना निष्पादन में व्यावहारिक विशेषज्ञता हासिल की। वर्ष,1979-80 से जॉन्स इलेक्ट्रिक कंपनी स्थापित कर इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर, निर्माता और इलेक्ट्रिकल कंट्रोल और पावर पैनल के कमीशनिंग के रूप में काम किया। जॉन्स इलेक्ट्रिक कंपनी की शुरुआत एक प्रोपराइटर के रूप में की। मेरा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, उद्यमिता, नवाचार और इलेक्ट्रिकल पावर जनरेशन और ऑटोमेशन उद्योग में नेतृत्व के क्षेत्र में कॅरियर रहा है। डिजाइन, परियोजना निष्पादन और विनिर्माण और विशेष रूप से नियंत्रण पैनल, डीजी सेट और सबस्टेशन स्वचालन में मुझे इस क्षेत्र में एक अनुभवी विशेषज्ञ के रूप में स्थापित किया है।
आप सामाजिक संगठनों से भी जुड़े हैं और क्या आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं?
मैं एनआरआई कॉलोनी राजआंगन सोसायटी के अध्यक्ष होने के नाते समय-समय पर आर्थिक दृष्टि से कमजोर लोगों को मदद व सहयोग करते रहते हैं। इसके अलावा नया सवेरा संगठन के जरिए गरीबों को आर्थिक सहयोग प्रदान करते हैं। नेशनल फैडरेशन ऑफ इंजीनियरिंग(सेफ्टी) के तहत युवाओं को मार्गदर्शन करते रहते हैं।
क्या आपको प्रतिस्पर्धा के समय कोई कठिनाई महसूस होती है?
हरेक व्यवसाय में प्रतिस्पर्धा आना तो स्वाभाविक है। पर इसे चुनौती के रूप में स्वीकाते हुए डटकर मुकाबला कर ध्येयता से आगे बढऩा ही सही रास्ता है।
आने वाले समय में आप अपने व्यवसाय को कहां तक बढ़ाना चाहते हैं?
भविष्य में मशीन नियंत्रण प्रोग्रामिंग और औद्योगिक स्वचालन में विशेषज्ञता, उद्योग के रुझानों के साथ संरेखित करना ही आगे का लक्ष्य है।
आप किसे अपना आदर्श मानते हैं?
इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति मेरे आदर्श हैं, जिनसे मुझे प्रेरणा मिलती रहती है। यह ना केवल इंजीनियरों और उद्यमियों के लिए, बल्कि उन सभी के लिए जो ईमानदारी, दृढ़ता और समावेशी विकास को महत्व देते हैं। एक साधारण शुरुआत से लेकर विश्व स्तर पर सम्मानित आईटी दिग्गज बनने तक का उनका सफर दूरदर्शी नेतृत्व, नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
युवाओं को अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए आप क्या सुझाव देना चाहते हैं?
मैं युवाओं से यह ही कहना है कि वे जो भी व्यवसाय करें ईमानदारी से करें। एक पुराने जमाने के आदर्श के रूप में नहीं, बल्कि सफलता और सम्मान की एक शाश्वत कुंजी के रूप में। ऐसी दुनिया में जो अक्सर शॉर्टकट और तुरंत परिणाम को प्राथमिकता देती है, सच्ची सफलता अभी भी उन लोगों की है जो अपने काम में दृढ़ता, धैर्य, समर्पण और ईमानदारी को अपनाते हैं। चाहे आप कोई भी रास्ता चुनें चाहे वह शिक्षा, कला, व्यवसाय, प्रौद्योगिकी या कोई अन्य क्षेत्र हो—ईमानदारी और कड़ी मेहनत के साथ काम करने की आपकी प्रतिबद्धता आपको दूसरों से अलग बनाएगी। चुनौतियां आएंगी, लेकिन धैर्य और दृढ़ता बाधाओं को सीढ़ी बना देगी।
केंद्र सरकार और राज्य सरकार से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं?
हम चाहते हैं कि सरकार योग्यता को प्राथमिकता दे और भ्रष्टाचार से लड़े, जिससे शासन, आर्थिक विकास और जनता के विश्वास में सुधार हो सके। हम चाहते हैं कि सरकार योग्यता आधारित नियुक्तियां सुनिश्चित करे और महत्वपूर्ण पदों पर भ्रष्टाचार को कम करे।

