ध्यान और चिंतन से जीवन को आनंदित किया जा सकता है: डॉ० जय मदान
जब तक जीतेगा नहीं रुकेगा नहीं: मंत्रालय प्रतिनिधि अतुल के. शाह
संतान, सनातन की ओर चली जाती है: डॉ० जय मदान
1 मई 26 हरिद्वार :- जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के पदाधिकारियों का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ 30 अप्रैल से 1 मई, पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में सम्पन्न हुआ। शिविर का आयोजन मंत्रालय द्वारा जनजातीय समुदायों के समग्र विकास के उद्देश्य से किया गया, जिसमें भारत सरकार का जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) एक नोडल मंत्रालय के अंतगत किया गया, जो देश में विभिन्न वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति के संरक्षण हेतु नीतियाँ बनाने व लागू करने के लिए जिम्मेदार है। चिंतन शिविर में, भारत के विभिन्न राज्यों के प्रधान सचिव, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, विशेषज्ञों और अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया। शुभारम्भ डॉ० अर्चना तिवारी व उनकी टीम के समूहगान से हुआ।
भारत सरकार के प्रतिनिधि श्री मनीष त्रिपाठी ने ग्रामीण समाज में आजीविका मॉडल की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जनजातीय विकास, अर्थव्यवस्था और सतत आजीविका के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों को साझा किया। इस अवसर पर जनजातीय वर्गों के लिए संचालित योजनाओं की समीक्षा की तथा भावी योजनाओं को सुदृढ़ बनाने हेतु रणनीतियों पर बल दिया। इसी क्रम में, भारत सरकार के प्रतिनिधियों एवं विशेषज्ञों ने जनजातीय कल्याण से जुड़ी योजनाओं की दिशा में अपने सामूहिक प्रयासों और अनुभवों का आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर, प्रसिद्ध ज्योतिषी व वास्तु विशेषज्ञ डॉ० जय मदान ने वास्तु के माध्यम से जीवन में संतुलन और सकारात्मकता बनाए रखने के उपाय बताए। उन्होंने वैदिक ग्रंथ ऋग्वेद में वर्णित पवित्र पेय ‘सोम’ का उल्लेख करते हुए बताया कि यह सोमलता से निर्मित औषधीय रस था, जिसे यज्ञों में देवताओं को अर्पित किया जाता था। “चंद्रमा का अमृत” (Nector of moon) शरीर को शीतलता और आंतरिक प्रसन्नता प्रदान करने का प्रतीक माना गया है। उन्होंने आध्यात्मिक योग को तन, मन और आत्मा का समन्वय बताया, जो साधक को परमात्मा से जोड़ता है। ‘लक्ष्मीवान’ शब्द समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने तीसरी आँख (आज्ञा चक्र) को जागृत करने हेतु त्राटक और ॐ जप जैसे सरल अभ्यासों पर जोर दिया, जो एकाग्रता और मानसिक शांति बढ़ाते हैं। ध्यान एवं चिंतन करने से जीवन में आनंद की अनुभूति होती है। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी संतानों को केवल जैविक नहीं अपितु भविष्य की पीढ़ी के रूप में भी परिभाषित किया गया।
मंत्रालय प्रतिनिधि अतुल के. शाह ने कहा कि हमें अनावश्यक चिंता से बचते हुए आत्मविश्वास से जीवन जीना चाहिए। ‘मुन्नाभाई’ फिल्म का उदाहरण देते हुए बताया कि केवल कागजी ज्ञान पर्याप्त नहीं बल्कि सहानुभूति और शांति से समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी होता है। उन्होंने कहा कि स्पष्ट लक्ष्य व्यक्ति को व्यक्तिगत सफलता और आर्थिक प्रगति की ओर ले जाते हैं तथा समाज में सकारात्मक मूल्यों का निर्माण करते हैं। उन्होंने प्रतिदिन कम से कम एक बार खुलकर हँसने की सलाह दी, इसे शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी बताते हुए कहा कि इससे तनाव के हार्मोन कम होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि सीखना, प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास व्यक्ति के कौशल, ज्ञान और दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाते हैं, जिससे वह नई परिस्थितियों में सहज रूप से सामंजस्य स्थापित कर पाता है। ‘जब तक जीतेगा नहीं, रुकेगा नहीं’ के भाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने संवेदनात्मक भागफल और भावनात्मक बुद्धिमत्ता के महत्व पर बल दिया। यह क्षमता व्यक्ति को अपनी तथा दूसरों की भावनाओं को समझने में सक्षम बनाती है और प्रभावी नेतृत्व के लिए एक महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होती है। कार्यक्रम में, डॉ० वरनाली ने स्वास्थ्य, संस्कृति एवं डिजिटल सशक्तीकरण जैसे मुद्दों पर चर्चा की। इसके अलावा, धरातल पर क्रियान्वित योजनाओं से प्राप्त अनुभवों को विचाराधीन रखा और उनके व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए गए। इसके साथ ही, वर्तमान योजनाओं को कैसे सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है, विषय पर चर्चा की गई। मंत्रालय का मानना है कि इस प्रकार के ‘चिंतन संवाद’ देशभर में जनजातीय समाज के समावेशी और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण है। भविष्य में भी इस प्रकार के चिंतन संवाद और विचार-विमर्श की परंपरा बनी रहेगी। ज्ञात हो कि जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार, भारत सरकार का एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है, जो देश की अनुसूचित जनजातियों (Tribal Communities) के विकास और अधिकारों की सुरक्षा के लिए कार्य करता है।
इस दौरान, अधिकारियों, विशेषज्ञों और सभी प्रतिनिधियों ने पतंजलि फूड, हर्बल गार्डन तथा अनुसंधान केंद्र का विस्तृत भ्रमण किया और गंगा आरती में भी सहभागिता की। उन्होंने किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के आयोजकों ने अतिथियों को प्रतीक चिह्न और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। अंत में, कार्यक्रम अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

