Sunday, July 5, 2026 |
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मशीनी युग की तरफ बढ़ रहा पैकेजिंग उद्योग

किसी भी उत्पाद को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण है पैकेजिंग

by Business Remedies
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Packaging industry moving towards the machine age

राजस्थान में धीरे-धीरे बढ़ रहा कारोबार

बिजनेस रेमेडीज/जयपुर। पैकेजिंग उद्योग न सिर्फ उत्पादों को सुरक्षित रखने का माध्यम है, बल्कि यह मार्केटिंग, ब्रांडिंग, उपभोक्ता अनुभव और आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। राजस्थान की अर्थव्यवस्था में पैकेजिंग उद्योग का योगदान बढ़ रहा है। खासत: एफएमसीजी, कृषि-उत्पाद, ई-कॉमर्स, खाद्य प्रसंस्करण आदि क्षेत्रों के विस्तार के कारण इसका महत्व अब बढ़ रहा है। अब बाजार में हर वस्तु पैकिंग में उपलब्ध है, यह पैकिंग वस्तु की गुणवत्ता को लंबे समय तक टिकाउ योग्य बनाती है। गौरतलब है कि राजस्थान का पैकेजिंग उद्योग कई अवसरों के साथ खड़ा है। सरकार और उद्योग एक साथ काम करें तो यह उद्योग सशक्त रूप से आगे बढ़ सकता है। स्थानीय उत्पादकों को लाभ, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास में योगदान मिल सकता है। यदि नियामकीय व्यवस्था, पर्यावरणीय जिम्मेदारियां और प्रौद्योगिकी उन्नयन को गंभीरता से लिया जाए, तो राजस्थान पैकेजिंग के क्षेत्र में न सिर्फ भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धी बन सकता है।

वर्तमान स्थिति उद्योग परिदृश्य :
राजस्थान में लगभग 511 पैकेजिंग कंपनियां हैं। इनमें से लगभग 91.4 प्रतिशत एकल-स्वामी हैं, बाकी बड़ी ब्रांड्स या समूहों से जुड़ी हुई हैं। सबसे ज्यादा कंपनियां जयपुर में हैं, इसके बाद जोधपुर और अजमेर जैसे शहरों में। इन कंपनियों की औसत उम्र लगभग 3 से 5 वर्ष की है, जो यह दर्शाती है कि बहुत सी कंपनियां अभी नई हैं।

तकनीकी और बाजार ट्रेंड्स:
फूडेबल पैकेजिंग, ई-कॉमर्स पैकेजिंग, ट्रांजिट पैकेजिंग आदि की मांग बढ़ रही है। पर्यावरण-अनुकूल पैकेजिंग सामग्री, जैसे कागज-आधारित पैकेजिंग व बायोडिग्रेडेबल विकल्पों की मांग भी हो रही है। बढ़ती मांग को देखते हुए उद्योग में स्वचालन और आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। लगातार बढ़ रही डिमांड के पैकेजिंग उद्योग और सप्लाई-चेन को समर्पित भारत पैक एक्सपो, जो जयपुर में आयोजित होने वाला है, नए उत्पाद, प्रौद्योगिकी और बाजार अवसर प्रदर्शित करेगा।

संभावनाएं बाजार की बढ़ती मांग:
एफएमसीजी, कृषि-उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण, औषधि, सौंदर्य प्रसाधन आदि क्षेत्रों में पैकेजिंग की आवश्यकता बढ़ रही है। खासकर पैकेजिंग सुरक्षा, ब्रांडिंग और प्रेजेंटेशन पर ध्यान बढ़ा है। ई-कॉमर्स चैनलों के विस्तार से छोटी-बड़ी पैकेजिंग इकाइयों के लिए बाजार खुल रहा है। उपभोक्ता और नियामक दोनों ही प्लास्टिक उपयोग कम करने और बायोडिग्रेडेबल, पुन:चक्रण सामग्री को अपनाने की मांग कर रहे हैं। इस क्षेत्र में निवेश की काफी संभावनाएं हैं। उद्योग और सरकार के बीच बेहतर समन्वय से निवेश त्वरित हो रहा है। जमीन आवंटन प्रक्रिया की सरलता, औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाएं जैसे बिजली, परिवहन, लॉजिस्टिक्स आदि क्षेत्रों में भी पहले के मुकाबले सुधार किया गया है।

स्थानीय मूल्य श्रृंखला का विकास
कच्चे माल की उपलब्धता, पैकेजिंग उद्योग, प्रिंटिंग व डिजाइन की सेवाएं, लेबलिंग आदि को स्थानीय रूप से विकसित हो रहे हैं। इससे पैकेजिंग की लागत और भी कम होगी। साथ ही प्रौद्योगिकी उन्नयन की दिशा में लगातार काम चल रहा है। इसके अलावा गुणवत्ता मानकों का पालन, विशेष रूप से खाद्य/औषधि पैकेजिंग में, बहुत जरूरी है। इसलिए पैकेजिंग उद्योग से जुडी कंपनियां इस दिशा में काफी कार्य कर रही हैं। सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध, नियामक अनुपालन जैसी चुनौतियां हैं।

उत्पादन लागत एवं कच्चे माल की दर:
1. पेट्रोकेमिकल व प्लास्टिक की कीमतों में उतार-चढ़ाव।
2. बिजली, ईंधन, श्रम लागत आदि बढऩे से उत्पादन महंगा होता जा रहा है।
3. परिवहन की लागत, अंदर-राज्य व बाह्य-राज्य आपूर्ति में, सडक़, भंडारण, सप्लाई चैन भी पहले के मुकाबले अब बेहतर हो रही है।
आज पूरी दुनिया ऑटोमाइजेशन की तरफ जा रही है। हर आदमी अपने आप को अपग्रेड कर रहा है। वर्तमान में लेबर बहुत महंगी है। इससे बचने के लिए अब मशीनों का सहारा लिया जा रहा है। जीएसटी के दर घटने से हमारी इंडस्ट्री को भी कुछ फायदा हुआ है। जैसे सिलाई मशीन 5 प्रतिशत पर आ गई। बिजली की मोटर पहले 28 प्रतिशत जीएसटी था, वह भी घट गया है। बाकी 99 प्रतिशत 18 प्रतिशत पर ही है। हमारा ट्रेडिंग का काम ज्यादा है। इसलिए राज्य सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलता। हमारी पैकिंग लाइन है। लिक्विड किसी भी वस्तु को पैक करने का काम हमारे यहां होता है। इसके अलावा लेबलिंग व कोडिंग का काम भी हमारे यहां होता है। इसके अलावा पैकिंग में काम आने वाला हर काम किया जाता है।
राहुल वशिष्ठ, निदेशक, महालक्ष्मी मशीनंस, जयपुर



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