Friday, December 5, 2025 |
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Ostwal Group – नवाचार और जागरूकता से किसान समृद्धि की दिशा में अग्रसर

by Business Remedies
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बिजनेस रेमेडीज। भारत में कृषि केवल आजीविका नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। देश के अधिकांश ग्रामीण परिवार खेती पर निर्भर हैं, परंतु बदलते मौसम, मिट्टी की घटती उर्वरता और बढ़ती लागतों ने किसानों की आय को चुनौती दी है।

ऐसे समय में, Ostwal Group of Industries (OGI) ने अपने दूरदर्शी दृष्टिकोण और वैज्ञानिक नवाचार के माध्यम से किसानों के लिए नई उम्मीद की किरण जगाई है। सन् 2002 में स्थापित ओस्तवाल ग्रुप ने उर्वरक, रसायन, ग्लोबल एग्रो-ट्रेड, रियल एस्टेट और IT जैसे विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में पाँच अत्याधुनिक उर्वरक संयंत्रों के साथ-साथ महाराष्ट्र के Dhule में नए संयंत्र के शुरू होने से समूह की कुल उत्पादन क्षमता 20 लाख मीट्रिक टन से अधिक हो जाएगी। समूह की दो कंपनियाँ — Krishana Phoschem Limited (KPL) और Madhya Bharat Agro Products Limited (MBAPL) — NSE में सूचीबद्ध हैं। “अन्नदाता” और “श्री गणपति” जैसे प्रतिष्ठित ब्रांडों के साथ ओस्तवाल ग्रुप आज भारत के सबसे तेज़ी से उभरते कृषि-उद्योग समूहों में अग्रणी है।

कृषक आय में सतत वृद्धि के उद्देश्य से, ओस्तवाल ग्रुप ने वर्ष 2023 में एक अभिनव कार्यक्रम शुरू किया —
“Product Innovation for Balanced Nutrition & Phygital Farmer Awareness.”
इस कार्यक्रम का लक्ष्य दो प्रमुख चुनौतियों का समाधान करना है:

  1. भारत की आयातित DAP (Di-Ammonium Phosphate) पर अत्यधिक निर्भरता, और
  2. मिट्टी में Zinc, Boron, Magnesium जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, जिससे फसल उत्पादन में 15–20% तक की गिरावट आती है।

ओस्तवाल ग्रुप ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए विकसित किया —
“Fortified Single Super Phosphate (SSP)”, जिसे सूक्ष्म पोषक तत्वों से समृद्ध किया गया है, ताकि मिट्टी की पोषण क्षमता बढ़े और फसलें अधिक स्वस्थ हों। इसके साथ ही समूह ने लॉन्च किया NPK 5:15:0:10, जो आयातित DAP का एक प्रभावी और किफायती विकल्प है। यह उत्पाद न केवल मिट्टी की उर्वरता को पुनर्स्थापित करता है, बल्कि किसानों की लागत घटाकर उनकी आय में भी वृद्धि करता है।

ओस्तवाल ग्रुप का मानना है कि किसान को सिर्फ उत्पाद नहीं, बल्कि ज्ञान और विश्वास भी चाहिए। इसी सोच से प्रेरित होकर समूह ने अपनाया एक अनोखा ‘Phygital’ (Physical + Digital) Model। खेतों में Demo Plots, किसान सभाएँ और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष अनुभव दिया गया, जबकि WhatsApp अभियान, Digital सलाह और Video सामग्री के ज़रिए हज़ारों किसानों तक नई जानकारी पहुँचाई गई।

यह मॉडल बना एक सशक्त सेतु —
“मिट्टी से मोबाइल तक किसान सशक्तिकरण।”

इस पहल ने कम समय में उल्लेखनीय परिणाम दिए हैं:
• फसल उत्पादकता में 10–15% वृद्धि — धान, गेहूँ, सोयाबीन, सरसों जैसी फसलों में प्रति हेक्टेयर 3–4 क्विंटल अतिरिक्त उपज।
• लागत में कमी — DAP की जगह NPK 5:15:0:10 अपनाने से प्रति हेक्टेयर लगभग ₹1,500 की बचत।
• किसान की आय में वृद्धि — कुल मिलाकर प्रति हेक्टेयर ₹6,000–₹8,000 और औसत किसान के लिए ₹12,000–₹16,000 वार्षिक अतिरिक्त आय।
• मिट्टी की सेहत में सुधार — संतुलित पोषण से मिट्टी की उर्वरता और जैविक सक्रियता में स्थायी वृद्धि।
• आत्मनिर्भर भारत में योगदान — स्वदेशी उत्पादन और तकनीक से देश की Phosphatic Fertilizer निर्भरता में कमी।

वर्ष 2024–25 में यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और गुजरात में सक्रिय है और अब तक 1.25 लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ पहुँचा चुका है।

Sustainable Development Goals (SDGs) की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। ओस्तवाल ग्रुप की यह पहल बेहतर उपज, स्थायी आय और संतुलित पोषण के माध्यम से भूखमुक्ति, आत्मनिर्भरता, जलवायु संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता जैसे प्रमुख SDGs को साकार कर रही है।

निष्कर्ष: फसल से सफल किसान की ओर
ओस्तवाल ग्रुप का विश्वास है कि किसान की समृद्धि ही राष्ट्र की समृद्धि है। जब किसान वैज्ञानिक सोच अपनाता है, मिट्टी की सेहत पर ध्यान देता है और संतुलित पोषण के महत्व को समझता है —
तभी उसकी मेहनत सचमुच “फसल से सफल” बनती है। ओस्तवाल ग्रुप का यह प्रयास भारत के कृषि परिदृश्य में नवाचार, ज्ञान और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहा है —

Ostwal Group of Industries – मिट्टी को पोषित कर राष्ट्र की सेवा में।



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